CG news : छत्तीसगढ़: सरकारी स्कूलों के 40% बच्चों तक अब भी नहीं पहुंचीं किताबें, इस बार किताबों पर बारकोड से होगी मॉनिटरिंग

CG news : छत्तीसगढ़: सरकारी स्कूलों के 40% बच्चों तक अब भी नहीं पहुंचीं किताबें, इस बार किताबों पर बारकोड से होगी मॉनिटरिंग

CG news : छत्तीसगढ़: सरकारी स्कूलों के 40% बच्चों तक अब भी नहीं पहुंचीं किताबें, इस बार किताबों पर बारकोड से होगी मॉनिटरिंग

CG news : छत्तीसगढ़ में नया शिक्षा सत्र 16 जून 2025 से शुरू हो चुका है, लेकिन अब भी करीब 40% सरकारी स्कूलों के छात्रों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। शिक्षा विभाग का अनुमान है कि इन छात्रों तक किताबें पहुंचने में अगले एक सप्ताह का समय और लग सकता है।

वहीं, निजी स्कूलों में किताबों का वितरण 1 जुलाई से शुरू किया जाएगा। इस बार किताब वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए हर किताब पर अलग-अलग बारकोड लगाया गया है।

क्यों हुई देरी?
पाठ्यपुस्तक निगम के अनुसार, इस साल किताबों के वितरण में देरी का एक मुख्य कारण पिछले साल बड़ी संख्या में किताबों का कबाड़ में मिलना रहा है। इस बार ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसलिए हर किताब पर दो बारकोड लगाए गए हैं। इन बारकोड्स को मोबाइल ऐप के माध्यम से स्कैन किया जाएगा, जिससे किताब की स्थिति, स्थान और वितरण से जुड़ी हर जानकारी रिकॉर्ड हो सके।

एक क्लास = 12 बार स्कैनिंग!
एक कक्षा में यदि 6 किताबें हैं, तो हर किताब पर दो बारकोड होने के चलते छात्र को कुल 12 बार स्कैनिंग करवानी होगी। इससे वितरण प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है, लेकिन इससे किताबों की कालाबाजारी और ग़लत वितरण पर रोक लगने की संभावना है।

1.82 करोड़ किताबों का वितरण
राज्य के सरकारी स्कूलों में कुल 1.82 करोड़ किताबों का वितरण होना है। इसमें कक्षा पहली से आठवीं तक के लिए 1.47 करोड़ किताबें, और कक्षा 9वीं-10वीं के लिए 35 लाख किताबें शामिल हैं। इसके अलावा, 8284 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को 55 लाख किताबें दी जाएंगी।

आत्मानंद स्कूलों में भी किताबों की कमी
राज्य सरकार द्वारा संचालित आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी किताबों की कमी देखी जा रही है। जानकारी के अनुसार, कक्षा तीसरी की किताबें अभी तक नहीं पहुंची हैं।

किताबों पर होगी सख्त निगरानी
इस बार बारकोड स्कैनिंग के ज़रिए किताबों की मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग दोनों की जा सकेगी। स्कैनिंग से यह भी पता चल सकेगा कि कौन-सी किताब किस स्कूल या छात्र तक पहुंची है।

“सरकारी स्कूलों में किताबों का वितरण अंतिम चरण में है। वहीं निजी स्कूलों में 1 जुलाई से वितरण शुरू होगा। इस बार हर किताब पर बारकोड लगाया गया है जिससे उनकी निगरानी बेहतर हो सके।”
– डिकेश पटेल, जीएम, पाठ्य पुस्तक निगम

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