CG News : कांकेर की महिला किसान ने बनाई जैविक दवा, 17 एकड़ में सब्जियों की खेती से हो रही लाखों की कमाई

CG News : कांकेर की महिला किसान ने बनाई जैविक दवा, 17 एकड़ में सब्जियों की खेती से हो रही लाखों की कमाई

CG News : कांकेर की महिला किसान ने बनाई जैविक दवा, 17 एकड़ में सब्जियों की खेती से हो रही लाखों की कमाई

CG News : खेती में नवाचार की मिसाल बनीं कांकेर जिले के थानाबोड़ी गांव की महिला किसान लेकेश बाई जैन। कीटों से फसल बचाने के लिए उन्होंने खुद के अनुभव से एक जैविक दवा तैयार की, जिससे न केवल रासायनिक पेस्टिसाइड्स से छुटकारा मिला, बल्कि आसपास के करीब 50 किसान भी इस तकनीक को अपना चुके हैं।

मठ्ठा, नीम, मिर्च और अनुभव से बनी असरदार दवा
बारहवीं तक शिक्षित लेकेश बाई ने 1996 में शादी के बाद थानाबोड़ी गांव में खेती शुरू की। परिवार के लिए धान भी मुश्किल से उगता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कांकेर जाकर कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से उन्नत खेती की तकनीक सीखी। उन्होंने मठ्ठा (छाछ), नीम पत्ती, फुडहर पत्ता, मिर्च और तांबे के लोटे के मिश्रण से एक जैविक दवा तैयार की।

कीट नियंत्रण के लिए यह दवा बेहद कारगर साबित हुई। व्हाइट फ्लाई जैसे कीटों पर लहसुन मिलाकर इसका उपयोग होता है। जहां बाजार के पेस्टिसाइड पर एक एकड़ के लिए ₹2000 तक खर्च आता है, वहीं यह जैविक दवा सिर्फ ₹300-400 में तैयार हो जाती है।

1 एकड़ से शुरू कर, 17 एकड़ तक पहुंची सफलता की कहानी
लेकेश बाई ने कर्ज लेकर खेत में बोर कराया और धान की जगह सब्जियों की खेती शुरू की। पहले साल से ही 2-3 लाख रुपये की आमदनी होने लगी। उन्होंने धीरे-धीरे आसपास की जमीन खरीदी और आज उनके पास 17 एकड़ जमीन है।

यहां वे टमाटर, मिर्च, करेला, भिंडी, बरबटी जैसी फसलें लेती हैं। ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई की जाती है और खरीदार खेत पर ही सब्जी लेने पहुंच जाते हैं। सब्जियां रायपुर, धमतरी, चारामा तक भेजी जाती हैं।

डेयरी और मछली पालन से मल्टी-सोर्स इनकम
खेती के साथ लेकेश बाई ने डेयरी की शुरुआत भी की। उनके पास अब 35 गायें हैं, जिनसे औसतन 200 लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादन होता है। चारा खेत से ही मिलता है। इसके अलावा, तालाब खुदवाकर मछली पालन शुरू किया गया है, जिससे अतिरिक्त आमदनी होती है।

30 लोगों को मिला रोजगार, 500 से ज्यादा किसान कर चुके हैं दौरा
आज उनके खेत में 8 परिवारों के 30 लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है। इन परिवारों के लिए खेत में ही आवास बनाए गए हैं। लेकेश बाई के नवाचार और मेहनत को देखने 500 से अधिक किसान आ चुके हैं, जिनमें से करीब 200 किसान उन्नत खेती को अपना भी चुके हैं।

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