CG News: छत्तीसगढ़ में करंट से मौतों पर हाईकोर्ट की सख्ती, बिजली कंपनी से 18 अगस्त तक मांगी स्टेटस रिपोर्ट
CG News: छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बिजली हादसों और करंट से मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. आकाशीय बिजली, खुले तारों और खेतों व बाड़ों में अवैध तरीके से लगाए गए करंट की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और बिजली कंपनी से जवाब मांगा है.
कागजों में होगी सुरक्षा या जमीन पर भी असर दिखेगा
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने पूछा कि आम जनता की सुरक्षा के लिए सिर्फ आदेश और सर्कुलर जारी किए जाएंगे या फिर जमीन पर भी कोई ठोस बदलाव नजर आएगा, हाईकोर्ट ने बिजली हादसों को रोकने के लिए बनाई जा रही SOP, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर, की प्रगति पर भी सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने CSPDCL को 18 अगस्त तक पूरी स्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं.

नए कनेक्शन की टेस्ट रिपोर्ट व्यवस्था खत्म करने पर सवाल
सुनवाई के दौरान बिजली कंपनी की ओर से पेश शपथ पत्र में एक अहम जानकारी सामने आई. छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड 2011 के तहत लो टेंशन उपभोक्ताओं के लिए नया कनेक्शन लेने या वायरिंग पूरी होने के बाद लाइसेंसी ठेकेदार की टेस्ट रिपोर्ट जमा करना जरूरी था, लेकिन बिजली कंपनी के अनुसार यह अनिवार्य व्यवस्था 2 मार्च 2026 को जारी आदेश के बाद समाप्त कर दी गई है. इस बदलाव को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
बिजली हादसे रोकने हाई लेवल कमेटी का गठन
हाईकोर्ट को बताया गया कि बिजली दुर्घटनाओं को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 20 जुलाई 2026 को एक विशेष कमेटी बनाई गई है. इस कमेटी में CSPDCL के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य के इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर को शामिल किया गया है, यह कमेटी बिजली सुरक्षा के लिए SOP तैयार करेगी और उसके अनुसार सुरक्षा उपायों को लागू करने का काम करेगी.
खेतों में करंट और सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह
बिजली कंपनी के एमडी के शपथ पत्र में बताया गया कि करंट से होने वाली ज्यादातर दुर्घटनाएं सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण हो रही हैं. इनमें बिना सुरक्षा नियमों के निर्माण कार्य और खेतों व बाड़ों में जानवरों से बचाव के लिए अवैध तरीके से करंट दौड़ाना प्रमुख कारण बताए गए हैं.
जागरूकता अभियान और सुरक्षा उपायों का दावा
CSPDCL ने कोर्ट को बताया कि सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी सेफ्टी रेगुलेशन 2023 और विद्युत अधिनियम 2003 के तहत सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, कंपनी ने बताया कि हुकिंग रोकने, सुरक्षित बिजली उपयोग और लोगों को जागरूक करने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं.
हाईकोर्ट ने मांगा ठोस काम का हिसाब
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि केवल कमेटी बनाना या आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है. कोर्ट ने बिजली कंपनी और ऊर्जा विभाग से पूछा है कि गठित कमेटी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं, साथ ही बिजली लाइनों की नियमित जांच, मेंटेनेंस, सुरक्षा मानकों के पालन और SOP लागू करने की दिशा में हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है, अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी. इस दौरान CSPDCL को अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी. देखना होगा कि बिजली सुरक्षा को लेकर सरकार और कंपनी की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रहती हैं या फिर जमीन पर भी बदलाव दिखाई देता है.