CG News: गोडबोले दंपती को राष्ट्रपति ने दिया सम्मान, 37 साल से आदिवासी अंचल में सेवा
CG News: सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की 66 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस सूची में छत्तीसगढ़ के ऐसे डॉक्टर दंपती भी शामिल रहे, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा को समर्पित कर दी।
पद्मश्री सम्मान से सम्मानित हुआ दंपती
छत्तीसगढ़ के रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया है, यह दंपती दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में दशकों से स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। स्थानीय लोग इन्हें “डॉक्टर भैया-भाभी” के नाम से जानते हैं।
37 साल से लगातार सेवा में समर्पित
गोडबोले दंपती पिछले लगभग 37 वर्षों से चिकित्सा सेवा से जुड़े हुए हैं। वे मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा जिले के निवासी हैं और 1990 के दशक में बस्तर क्षेत्र में आकर बस गए थे, इसके बाद से वे लगातार ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नशामुक्ति जैसे सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में सेवा
अबूझमाड़ और नारायणपुर जैसे संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में नक्सली चुनौती के बीच भी उन्होंने लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं, उन्होंने कुष्ठ रोग, टीबी, मलेरिया और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज और जागरूकता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
1 लाख से अधिक मरीजों का मुफ्त इलाज
जानकारी के अनुसार, गोडबोले दंपती अब तक 1 लाख से अधिक मरीजों का मुफ्त इलाज कर चुके हैं। उनकी निःस्वार्थ सेवा और समर्पण को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा है, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस उपलब्धि पर दोनों डॉक्टरों को बधाई दी है, उन्होंने कहा कि बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में दशकों से मानवता की सेवा करने वाले इस दंपती को मिला यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।