CG News: बर्खास्त शिक्षकों के समर्थन में उतरे सांसद बृजमोहन अग्रवाल, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

CG News: बर्खास्त शिक्षकों के समर्थन में उतरे सांसद बृजमोहन अग्रवाल, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

CG News:छत्तीसगढ़ में बर्खास्त सहायक शिक्षकों के समायोजन की मांग को लेकर अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखते हुए इस विषय में संवेदनशीलता दिखाने और बर्खास्त शिक्षकों को समायोजित करने की मांग की है।

क्या है मामला?

बृजमोहन अग्रवाल ने पत्र में लिखा कि मई 2023 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा टी-संवर्ग के 5492 और ई-संवर्ग के 793, कुल 6285 सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसमें बीएड और डीएड दोनों योग्यताओं को मान्यता दी गई थी, और उसी आधार पर उम्मीदवारों से आवेदन मंगाए गए थे।
चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई, उनमें से 2621 शिक्षक, जो राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत थे, उन्हें केवल 16 माह सेवा देने के बाद बर्खास्त कर दिया गया।

बर्खास्त शिक्षकों की स्थिति

सांसद ने पत्र में बताया कि बर्खास्त किए गए ये शिक्षक मध्यमवर्गीय और बीपीएल परिवारों से आते हैं। सरकारी नौकरी पाने के बाद इन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी छोड़ दी थी। अब जब नौकरी भी चली गई, तो इनका भविष्य पूरी तरह संकट में पड़ गया है।
अग्रवाल ने कहा कि यह तकनीकी त्रुटि से हुई बर्खास्तगी है, जिससे इन परिवारों पर रोज़ी-रोटी का संकट मंडरा रहा है। कई शिक्षक आंदोलनरत हैं और पिछले कई महीनों से समायोजन की मांग कर रहे हैं।

संविधान और सरकार की ज़िम्मेदारी
पूर्व मंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए लिखा कि राज्य सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि किसी भी नागरिक का जीवन संकट में न आए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि राज्य के मिडिल और हाई स्कूलों में बड़ी संख्या में प्रयोगशाला सहायकों के पद रिक्त हैं, जिन पर इन शिक्षकों को योग्यतानुसार समायोजित किया जा सकता है।

क्या बोले सांसद बृजमोहन अग्रवाल?
“सरकार को चाहिए कि वह इन शिक्षकों के विषय में गंभीरता से विचार करे। यह केवल रोजगार का मामला नहीं है, यह परिवारों के भविष्य और जीवन रक्षा का प्रश्न है। मैं मुख्यमंत्री से आग्रह करता हूँ कि इस मुद्दे को प्राथमिकता दें।”

अभी तक कोई निर्णय नहीं

सांसद के अनुसार, शासन और प्रशासन ने समय-समय पर शिक्षकों को आश्वासन जरूर दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस पत्र के बाद इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

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