CG News: लाखासार गौधाम में अव्यवस्थाओं पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा जवाब
CG News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के लाखासार गौधाम में मवेशियों की खराब स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू कर दी गई है और पशुपालन विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
छोटे शेड में 200 से अधिक मवेशी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौधाम में महज 10×26 फीट के छोटे शेड में करीब 205 गायों को ठूंसकर रखा गया है। स्थिति इतनी खराब है कि मवेशियों को बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, एक मवेशी के लिए कम से कम 30-40 वर्गफुट स्थान जरूरी होता है, लेकिन यहां क्षमता से कई गुना अधिक पशु रखे गए हैं।
चारा-पानी और देखरेख की भी कमी
गौधाम में केवल जगह ही नहीं, बल्कि चारा और पानी की भी गंभीर कमी बताई जा रही है। 200 से अधिक मवेशियों के लिए दिनभर में बेहद कम मात्रा में चारा उपलब्ध हो पा रहा है। हैरानी की बात यह है कि 25 एकड़ के बड़े परिसर की देखरेख केवल एक चौकीदार के भरोसे है।
पशु कल्याण पर सवाल
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नवजात बछड़ों को उनकी मां से अलग रखा जा रहा है, जो पशु कल्याण के मानकों के खिलाफ माना जाता है। इसके अलावा दूध के उपयोग को लेकर भी अनियमितताओं की बात कही गई है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस मामले पर सुनवाई करते हुए रमेश सिन्हा और रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सरकारी व्यवस्था पर नाराजगी जताई और विस्तृत जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 14 मई को तय की गई है, गौरतलब है कि इस गौधाम का उद्घाटन 14 मार्च को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया था। उस दौरान यहां विकास कार्यों और गौसंरक्षण को बढ़ावा देने के कई ऐलान भी किए गए थे।
सड़कों पर अब भी मवेशी
गौधाम का उद्देश्य सड़कों से मवेशियों को हटाना था, लेकिन सकरी, लाखासार और तखतपुर मार्ग पर अब भी मवेशियों के झुंड देखे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा पशुओं को गौधाम तक लाने में भी प्रशासन को सफलता नहीं मिल रही है, यह मामला अब न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि पशु कल्याण और सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़े कर रहा है।