CG News : छत्तीसगढ़ के लाल गलियारे में मोबाइल क्रांति, लौटने लगे ग्रामीण

CG News : छत्तीसगढ़ के लाल गलियारे में मोबाइल क्रांति, लौटने लगे ग्रामीण

CG News : छत्तीसगढ़ के लाल गलियारे में मोबाइल क्रांति, लौटने लगे ग्रामीण

CG News :  छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादियों से मुक्त कराए गए गांवों में अब विकास की रोशनी पहुंच रही है। सरकार ने बीते एक वर्ष में 300 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए हैं, जिससे इन दुर्गम क्षेत्रों में संचार व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सशक्त हो गई है। इनमें से 32 टावर अबूझमाड़ के घने और माओवादी प्रभाव वाले इलाकों में लगाए गए हैं।

सुरक्षा के बाद प्राथमिकता संचार को

राज्य और केंद्र सरकार की रणनीति के तहत, जैसे ही किसी गांव को माओवादियों से मुक्त कराया जाता है, वहां पहले सुरक्षा शिविर स्थापित किया जाता है और उसके बाद सबसे पहले मोबाइल टावर और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जाती हैं।

नारायणपुर जिले के गरपा गांव इसका उदाहरण है, जहां 6 नवंबर 2024 को सुरक्षा बलों द्वारा कैंप स्थापित किया गया और तीन हफ्तों के भीतर वहां मोबाइल टावर भी लगा दिया गया। परिणामस्वरूप, अब तक करीब 300 ग्रामीण वापस अपने गांव लौट चुके हैं।

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माओवादियों का डर बरकरार

हालांकि माओवादी इन टावरों को संदेह की नजर से देख रहे हैं। उन्हें आशंका है कि ग्रामीण सुरक्षा बलों को उनकी गतिविधियों की जानकारी देते हैं। बीते वर्ष कम से कम चार घटनाओं में टावरों को जला दिया गया है। हाल ही में नारायणपुर जिले में माओवादियों ने एक टावर को जला दिया और दो ग्रामीणों की निर्मम हत्या कर दी।

संचार से जुड़ रहा है विकास और विश्वास

गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 10,511 क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनमें से करीब 8,000 क्षेत्रों में सेल टावर लगाए जा चुके हैं। इस पहल से वो इलाके जो कभी नक्सल हिंसा के भय से खाली हो गए थे, अब दोबारा बसने लगे हैं। ग्रामीण अब अपने परिवारों से संपर्क कर पा रहे हैं, सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं से सीधे जुड़ रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में फिर से भागीदारी कर रहे हैं।

जल्द ही शेष 79 टावर भी लगेंगे

सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर क्षेत्र के बाकी बचे 79 माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में भी जल्द ही संचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। यह संचार क्रांति न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि यह माओवाद प्रभावित इलाकों में शांति, पुनर्वास और विश्वास की वापसी का संदेश भी है।

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