CG News: सरकारी नौकरी वाली पत्नी को भी मिलेगा मुकदमे का खर्च, हाई कोर्ट ने पति की अपील की खारिज
CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक मामलों में अंतरिम सहायता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी की आय पति से अधिक हो, तब भी उसे अदालत में मुकदमे की पैरवी के लिए आवश्यक खर्च प्राप्त करने का अधिकार रहेगा।
पति ने दी थी आय का हवाला
मामला अंबिकापुर और विश्रामपुर के एक दंपति से जुड़ा है, जिनके बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। पति ने तलाक की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान पत्नी ने अदालत से मुकदमे के खर्च और अन्य सहायता की मांग की, पति का तर्क था कि पत्नी सरकारी शिक्षिका है और उसकी मासिक आय उससे कहीं अधिक है। इसलिए उसे किसी प्रकार की आर्थिक सहायता दिए जाने की जरूरत नहीं है।
कुटुंब न्यायालय ने दिया था यह आदेश
सुनवाई के बाद कुटुंब न्यायालय ने माना कि पत्नी अपनी आजीविका चलाने में सक्षम है, इसलिए उसे मासिक भरण-पोषण राशि नहीं दी जा सकती। हालांकि अदालत ने मुकदमे की पैरवी के लिए एकमुश्त कानूनी खर्च और प्रत्येक सुनवाई में आने-जाने तथा भोजन संबंधी खर्च देने का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट ने बरकरार रखा फैसला
इस आदेश को पति ने हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अदालत ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक मामलों में सुनवाई के दौरान पक्षकारों को कई बार अदालत आना पड़ता है, जिससे यात्रा और अन्य खर्च स्वाभाविक रूप से होते हैं, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि भरण-पोषण के लिए नहीं बल्कि मुकदमे में प्रभावी रूप से भाग लेने के लिए आवश्यक खर्च के रूप में दी जाती है।
खर्च की राशि को बताया उचित
हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा निर्धारित की गई राशि न तो अत्यधिक है और न ही अनुचित। साथ ही पति यह साबित नहीं कर पाया कि इस खर्च से उस पर कोई असहनीय आर्थिक बोझ पड़ेगा।
अपील खारिज, आदेश बरकरार
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कुटुंब न्यायालय का आदेश कानून और न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है। आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई, इसलिए पति की अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया।