CG News : छत्तीसगढ़ के गौरव पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन

CG News : छत्तीसगढ़ के गौरव पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन

CG News : छत्तीसगढ़ के गौरव पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन

CG News : छत्तीसगढ़ के जाने-माने हास्य कवि और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. सुरेंद्र दुबे का गुरुवार को रायपुर में निधन हो गया। उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहाँ उनकी एंजियोप्लास्टी की गई थी। उनके निधन पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित साहित्य और कला जगत की कई हस्तियों ने दुख व्यक्त किया है, इसे एक अपूरणीय क्षति बताया है।

ब्लैक डायमंड’ का सफर थमा

छत्तीसगढ़ी भाषा और हर छत्तीसगढ़िया की पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाने वाले प्रसिद्ध हास्य कवि और राष्ट्रीय मंच संचालन की विधा को नई ऊंचाई देने वाले पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का गुरुवार को निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे। उनके निधन से साहित्य जगत और छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है।

डॉ. दुबे रायपुर के एडवांस कॉर्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में अंतिम सांस ली। 24 जून की रात उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ 25 जून को उनकी एंजियोप्लास्टी कर दो स्टेंट डाले गए थे। ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ जैसी लोकप्रिय पंक्ति को विश्वभर के मंचों पर प्रचारित करने वाले डॉ. दुबे का यूं चले जाना एक अपूरणीय क्षति है।

देश-दुनिया की हस्तियों ने जताया दुख

पद्मश्री डॉ. दुबे के निधन की सूचना पर देश-दुनिया की कई हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। राज्यपाल रमण डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कई मंत्रियों सहित कवि डॉ. कुमार विश्वास, शैलेश लोढ़ा और पूरे काव्य जगत ने इसे साहित्य के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है। डॉ. दुबे को 2008 में काका हाथरसी हास्य रत्न सम्मान से नवाजा गया था, और 2010 में भारत सरकार द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी हास्य कवि

हिंदी साहित्य जगत के वरिष्ठ कवि मीर अली मीर और रामेश्वर वैष्णव ने संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. दुबे एक व्यवहारिक और संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी थे। उनके अचानक चले जाने को साहित्य का एक चमकता सितारा टूटने जैसा बताया गया। डॉ. दुबे की रचनाएं आम जनजीवन से जुड़ी होती थीं, और उनके हास्य-व्यंग्य समाज का आईना होते थे, जिनमें लोगों के लिए गहरा संदेश छिपा होता था।

अंतिम काव्य पाठ और ‘ब्लैक डायमंड’ का सफर

डॉ. दुबे ने आखिरी बार 22 जून को रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में हुए ‘काव्य कुंभ’ में अपनी कविताओं से सबको हंसाया था। वे खुद को ‘ब्लैक डायमंड’ बताते थे, 8 अगस्त, 1953 को बेमेतरा में जन्मे डॉ. दुबे ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जो अद्वितीय है: वे भारत के एकमात्र हास्य-व्यंग्य कवि थे जिन्होंने ऐतिहासिक लाल किले पर सर्वाधिक बार और 25 से अधिक देशों में काव्य पाठ किया।

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