CG News : छत्तीसगढ़ के इस गांव में ‘चुगली’ की तो लगेगा 5,000 का जुर्माना, शराब पर भी कड़े नियम

CG News : छत्तीसगढ़ के इस गांव में 'चुगली' की तो लगेगा 5,000 का जुर्माना, शराब पर भी कड़े नियम

CG News : छत्तीसगढ़ के इस गांव में ‘चुगली’ की तो लगेगा 5,000 का जुर्माना, शराब पर भी कड़े नियम

CG News : सामाजिक समरसता और भाईचारे को बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मेढ़की गांव ने एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। ग्राम विकास समिति ने गांव के माहौल को विवादों से बचाने के लिए अब चुगली’ करने पर 5,000 रुपये का आर्थिक दंड निर्धारित किया है।

https://youtu.be/EJoToaMnNC0?si=M_SOKE_tI0LxNRDD

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?

जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित मेढ़की गांव में पिछले कुछ समय से आपसी टिप्पणियों और पीठ पीछे की जाने वाली बातों (चुगली) के कारण तनाव बढ़ रहा था। हाल ही में दो पक्षों के बीच हुए बड़े विवाद की मुख्य जड़ भी यही ‘चुगली’ पाई गई।

गांव की शांति भंग होते देख ग्रामीणों ने एक सामूहिक बैठक बुलाई और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि किसी भी सार्वजनिक स्थान, चौक-चौराहों या सामाजिक कार्यक्रमों में किसी की व्यक्तिगत आलोचना या भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी करने पर पूर्ण रोक रहेगी।

दंड का प्रावधान और नियम

ग्राम समिति ने अनुशासन बनाए रखने के लिए जुर्माने की एक सूची तैयार की है:

  • चुगली करने पर: ₹5,000 का जुर्माना।
  • शराब बेचने या सार्वजनिक स्थल पर पीने पर: ₹10,000 का जुर्माना।
  • धार्मिक/सामाजिक कार्यक्रम में शराब पीकर आने पर: ₹5,000 का जुर्माना।

विकास में खर्च होगी जुर्माने की राशि

गांव के सरपंच मंजूलता परस साहू और विकास समिति के अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव ने बताया कि इस नियम का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि गांव में सुरक्षा और आपसी प्रेम बनाए रखना है। खास बात यह है कि जुर्माने से इकट्ठा होने वाली राशि को गांव के ही जनहित और विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा। नियम तोड़ने वालों की सूचना देने वालों को पुरस्कृत भी किया जाता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस स्व-अनुशासन की पहल पर अपर कलेक्टर अजय किशोर का कहना है कि यह ग्रामीणों द्वारा गांव की बेहतरी और शांति के लिए लिया गया अपना आंतरिक निर्णय है। ग्रामीण हर महीने बैठक कर इन नियमों की समीक्षा भी करते हैं ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।

मेढ़की गांव की यह पहल बताती है कि अगर समाज ठान ले, तो आपसी विवादों को कानूनी पचड़ों में पड़ने के बजाय जमीनी स्तर पर सुलझाया जा सकता है। अब देखना यह है कि क्या अन्य गांव भी अनुशासन की इस राह पर चलेंगे।

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