CG High Court News: बुजुर्गों की देखभाल न करने पर गिफ्ट डीड रद्द, संपत्ति लौटाने का हाई कोर्ट आदेश

CG High Court News: बुजुर्गों की देखभाल न करने पर गिफ्ट डीड रद्द, संपत्ति लौटाने का हाई कोर्ट आदेश

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बुजुर्गों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति बुजुर्गों से संपत्ति दान के रूप में प्राप्त करता है, तो उस पर उनकी देखभाल की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी स्वतः लागू होती है, चाहे गिफ्ट डीड में इसका उल्लेख हो या नहीं।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की एकल पीठ जस्टिस एन.के. व्यास ने कहा कि बुजुर्गों से संपत्ति लेने के बाद उनकी उपेक्षा करना कानून और मानवीय मूल्यों—दोनों के खिलाफ है। ऐसे मामलों में गिफ्ट डीड को निरस्त किया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला

मामला बिलासपुर के कोनी क्षेत्र का है, जहां बुजुर्ग दंपती सुरेशमणि तिवारी और उनकी पत्नी ने अपने भतीजे रामकृष्ण को यह सोचकर संपत्ति दान की थी कि वह बुढ़ापे में उनका सहारा बनेगा।
लेकिन कुछ समय बाद भतीजे ने उन्हें उनके ही घर से बाहर निकाल दिया, जिससे दंपती को वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।

कलेक्टर कोर्ट से हाई कोर्ट तक मामला

पीड़ित बुजुर्ग ने कलेक्टर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। मामले को वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण कानून के तहत मानते हुए कलेक्टर ने गिफ्ट डीड रद्द कर संपत्ति बुजुर्गों को लौटाने का आदेश दिया।
इस आदेश को चुनौती देते हुए भतीजे ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाई कोर्ट का अंतिम फैसला

हाई कोर्ट ने कलेक्टर कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि
“बुजुर्गों को उनकी ही संपत्ति से वंचित कर वृद्धाश्रम भेजना अमानवीय है और कानून की भावना के विरुद्ध है।”

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