शराब घोटाला केस: जमानत के बाद पहली बार कोर्ट में पेश होंगे कवासी लखमा, ED आज रखेगी जांच की स्थिति

शराब घोटाला केस: जमानत के बाद पहली बार कोर्ट में पेश होंगे कवासी लखमा, ED आज रखेगी जांच की स्थिति

रायपुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा आज शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत में पेश होंगे। जमानत मिलने के बाद यह उनकी पहली कोर्ट हाजिरी होगी, जिस पर राजनीतिक और जांच एजेंसियों की खास नजर बनी हुई है।

करीब एक साल से अधिक समय (379 दिन) जेल में रहने के बाद लखमा को 4 फरवरी को सशर्त जमानत मिली थी। इसके ठीक दो दिन बाद आज कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है।

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

ED ने शराब घोटाले से जुड़े मामलों में कवासी लखमा को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि आबकारी मंत्री रहते हुए उन्होंने शराब कारोबार से जुड़े एक संगठित सिंडिकेट को संरक्षण दिया, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

ED का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई और उसे अलग-अलग माध्यमों से ठिकाने लगाया गया।

जमानत के साथ सख्त शर्तें

लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने लखमा को जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि

  • वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे

  • किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे

  • बिना अनुमति राज्य से बाहर नहीं जाएंगे

आज की सुनवाई में ED द्वारा केस की प्रगति और आगे की जांच से जुड़ी जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी जा सकती है।

गिरफ्तारी और रिमांड का पूरा घटनाक्रम

ED ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें 7 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई।

21 जनवरी से 4 फरवरी तक वे न्यायिक रिमांड पर रायपुर सेंट्रल जेल में बंद रहे। 4 फरवरी को उन्हें जमानत मिली।

क्यों हुई कवासी लखमा की गिरफ्तारी?

ED के अनुसार, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के मुख्य कर्ताधर्ताओं में शामिल थे। आरोप है कि सिंडिकेट की गतिविधियां उन्हीं के निर्देशों पर संचालित होती थीं। ED का कहना है कि छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस प्रणाली लागू कराने में भी लखमा की अहम भूमिका रही। इसके अलावा आबकारी विभाग में चल रही अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

कमीशन की रकम से निजी निर्माण कार्य का आरोप

ED के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में दावा किया था कि यह घोटाला करीब 3 साल तक चला। इस दौरान कवासी लखमा को हर महीने लगभग 2 करोड़ रुपये की अवैध राशि मिली। ED के अनुसार, करीब 72 करोड़ रुपये की रकम का इस्तेमाल लखमा के बेटे हरीश कवासी के घर निर्माण और कांग्रेस भवन, सुकमा के निर्माण में किया गया।

जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि इस पूरे घोटाले से 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई सिंडिकेट के सदस्यों तक पहुंची।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ED द्वारा की जा रही है। इस मामले में ACB में दर्ज FIR के अनुसार घोटाले की राशि 2,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। ED का आरोप है कि यह घोटाला तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नेतृत्व वाले सिंडिकेट के जरिए अंजाम दिया गया।

तीन स्तरों (A, B, C) में हुआ घोटाला

A कैटेगरी – डिस्टलरी से कमीशन

डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी पहले 75 और बाद में 100 रुपये तक वसूले गए। नुकसान की भरपाई के लिए शराब की कीमतें बढ़ाई गईं और ओवर बिलिंग की छूट दी गई।

B कैटेगरी – नकली होलोग्राम वाली शराब

नकली होलोग्राम लगाकर अतिरिक्त शराब तैयार की गई और सरकारी दुकानों के जरिए बेची गई। इसके लिए सप्लाई चेन, बोतलें और परिवहन तक की पूरी व्यवस्था सिंडिकेट ने की।

C कैटेगरी – सप्लाई जोन में हेरफेर

डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को घटा-बढ़ाकर कमीशन वसूला गया। जांच में सामने आया है कि केवल इस कैटेगरी से 52 करोड़ रुपये की अवैध वसूली हुई।

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