CG News: नवरात्र में कमर्शियल गैस की किल्लत, ट्रस्ट और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ीं
CG News: चैत्र नवरात्र के दौरान डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी मंदिर में कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत ने आयोजकों और प्रशासन की तैयारियों पर प्रश्न खड़ा कर दिया है, प्रशासन ने 100 सिलेंडरों की आपूर्ति की अनुमति दी थी, लेकिन बुधवार शाम तक ट्रस्ट को एक भी सिलेंडर नहीं मिला, इसके कारण ट्रस्ट को श्रद्धालुओं और कर्मचारियों के लिए चूल्हे पर भोजन तैयार करना पड़ा, ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि, समय पर गैस मिलने पर व्यवस्थाएं सुचारू रहतीं, लेकिन फिलहाल राहत नहीं मिली है.
ट्रस्ट ने चूल्हों पर भोजन बनाने की तैयारी क
डोंगरगढ़ मंदिर ट्रस्ट ने नौ दिनों के लिए 100 सिलेंडरों की मांग की थी, हालांकि खाद्य विभाग ने दावा किया कि, समस्या का समाधान कर दिया गया है और आपूर्ति की अनुमति दे दी गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह आदेश अभी तक लागू नहीं हो पाया, नवरात्र के दौरान ट्रस्ट को लगभग 2500 कर्मचारियों और पुलिस जवानों के लिए भोजन तैयार करना होता है, पिछले वर्ष इस मेले में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए आए थे.
होटल और रेस्टोरेंट भी प्रभावित
सिर्फ मंदिर तक ही नहीं, बल्कि डोंगरगढ़ के होटल, रेस्टोरेंट और अस्थायी दुकानों में भी गैस की कमी स्पष्ट दिखाई दे रही है, कई व्यापारियों ने लकड़ी के भरोसे भोजन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है, राधे मोहन कन्नौजिया जैसे दुकानदारों को गैस नहीं मिलने पर 17 हजार रुपये में लकड़ी खरीदनी पड़ी, शिवम रेस्टोरेंट समेत कई प्रतिष्ठानों ने भी चूल्हों पर भोजन बनाना शुरू कर दिया है.
नए नियम और वैकल्पिक व्यवस्था
कमर्शियल सिलेंडरों की नई व्यवस्था के तहत व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को उनके पिछले महीने की खपत का केवल 20 प्रतिशत ही गैस मिलेगी, आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, छात्रावास, जेल और रेलवे स्टेशन को बिना कटौती आपूर्ति की जाएगी, सरकारी कार्यालयों और कैंटीन को 50 प्रतिशत गैस मिलेगी, कमर्शियल की जगह घरेलू सिलेंडर के उपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं.
प्रशासनिक दावे और जमीनी हकीकत
खाद्य विभाग ने दावा किया कि, घरेलू गैस की आपूर्ति नियमित है, लेकिन नवरात्र जैसे बड़े आयोजनों में कमर्शियल गैस की कमी ने व्यवस्थाओं को संकट में डाल दिया, ट्रस्ट और व्यापारियों को अब चूल्हों पर भोजन बनाने के भरोसे रहना पड़ रहा है, जो प्रशासनिक तैयारियों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.