CG News : बीजापुर में नक्सली कहर: सरेंडर नक्सली और ग्रामीण की हत्या, सात दिन में पांच लोगों की ली जान

CG News : बीजापुर में नक्सली कहर: सरेंडर नक्सली और ग्रामीण की हत्या, सात दिन में पांच लोगों की ली जान

CG News : बीजापुर में नक्सली कहर: सरेंडर नक्सली और ग्रामीण की हत्या, सात दिन में पांच लोगों की ली जान

CG News : नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में एक बार फिर हिंसा ने कहर बरपाया है। शनिवार देर रात नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक में दो ग्रामीणों की बेरहमी से हत्या कर दी। मृतकों में एक सरेंडर नक्सली समैय्या और दूसरा ग्रामीण वेको देवा शामिल हैं। घटना पामेड़ थाना क्षेत्र के सेंड्राबोर और एमपुर गांव की बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार, बड़ी संख्या में हथियारबंद नक्सली रात के समय गांव पहुंचे और दोनों ग्रामीणों को उनके घरों से अगवा कर लिया। जंगल में ले जाकर दोनों पर मुखबिरी करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद शवों को गांव में फेंक कर नक्सली फरार हो गए। मृतक समैय्या ने इसी वर्ष 2025 में आत्मसमर्पण किया था।

पुलिस को सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी गई है। इस दर्दनाक वारदात ने क्षेत्र में एक बार फिर दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

तीन ग्रामीणों की निर्मम हत्या

इस घटना से पहले 17 जून को भी बीजापुर जिले के पेद्दाकोरमा गांव में नक्सलियों ने तीन ग्रामीणों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। मृतकों में 13 वर्षीय छात्र अनिल माड़वी, 20 वर्षीय कॉलेज छात्र सोमा मोड़ियाम और एक अन्य ग्रामीण शामिल था। नक्सलियों ने सभी पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने और सरेंडर नक्सली दिनेश मोड़ियम का सहयोगी होने का आरोप लगाया था।

ग्रामीणों के मुताबिक, उस शाम गांव में करीब 70 से 80 हथियारबंद नक्सली पहुंचे थे और घरों से तीनों युवकों को जबरन उठाकर परिजनों के सामने ही उनकी हत्या कर दी गई। सोमा हाल ही में 12वीं पास कर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था, जबकि अनिल सातवीं कक्षा का छात्र था और डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था।

गांव में खौफ का माहौल

हत्याओं के बाद नक्सलियों ने गांव के 10 से अधिक युवकों को बंधक बनाकर जंगल ले जाकर उनकी भी बुरी तरह पिटाई की और रात में उन्हें छोड़ा। लगातार हो रही नक्सली हिंसा से गांवों में भय और दहशत का माहौल है। कोई भी ग्रामीण मीडियाकर्मियों के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

इस तरह की घटनाएं दर्शाती हैं कि नक्सली अब न केवल सरेंडर नक्सलियों और उनके परिवारों, बल्कि स्कूली छात्रों और आम नागरिकों को भी निशाना बना रहे हैं।

 

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