CG News: मौत के बाद भी आयुष्मान रिकॉर्ड में 42 दिन भर्ती रहा आरक्षक, सिस्टम पर उठे सवाल

CG News: मौत के बाद भी आयुष्मान रिकॉर्ड में 42 दिन भर्ती रहा आरक्षक, सिस्टम पर उठे सवाल

CG News: मौत के बाद भी आयुष्मान रिकॉर्ड में 42 दिन भर्ती रहा आरक्षक, सिस्टम पर उठे सवाल

CG News: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला अंबिकापुर से सामने आया है, जिस आरक्षक की करीब 42 दिन पहले मौत हो चुकी थी और अस्पताल उसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर चुका था, उसी मृतक के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से मैसेज भेजा गया, मैसेज में लिखा था कि आप स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं, इस घटना ने अस्पताल और आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

इलाज के दौरान हो गई थी आरक्षक की मौत

मामला अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से जुड़ा है, जशपुर जिले के कटंगखार निवासी आरक्षक देवनारायण राम का अस्पताल में इलाज चल रहा था, परिजनों के मुताबिक इलाज के दौरान 30 जून को उनकी मौत हो गई थी, अस्पताल प्रबंधन ने मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया था, लेकिन इसके बाद सामने आए आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में उन्हें कथित तौर पर 42 दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया, जिससे परिजन भी हैरान हैं.

मृतक के नाम पर 42 दिन तक रिकॉर्ड कैसे चला

मृतक की पत्नी और मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्टाफ नर्स सीमा कुजूर ने आरोप लगाया कि उनके पति की इलाज के दौरान महज चार दिनों में मौत हो गई थी, इसके बावजूद आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में उन्हें 42 दिनों तक भर्ती दिखाया गया, अब सवाल उठ रहा है कि मौत के बाद भी मरीज के नाम पर अस्पताल में भर्ती का रिकॉर्ड कैसे चलता रहा, क्या उनके नाम से कोई क्लेम बनाया गया, इन सभी बिंदुओं की जांच की जरूरत है.

मौत के 42 दिन बाद आया स्वास्थ्य विभाग का संदेश

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू मौत के करीब 42 दिन बाद आया वह मैसेज है, जो मृतक की पत्नी के मोबाइल पर आयुष्मान सारथी योजना की ओर से पहुंचा, संदेश में देवनारायण राम के स्वस्थ होकर घर जाने की बात कही गई थी, जबकि उनकी मौत हो चुकी थी, ऐसे में यह केवल तकनीकी गलती है या फिर रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, इसे लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

पत्नी ने जांच और कार्रवाई की मांग की

मृतक की पत्नी सीमा कुजूर ने पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारी तथा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आयुष्मान पोर्टल पर मृतक को 42 दिनों तक भर्ती किसने दिखाया, उनके नाम पर इलाज और क्लेम का कोई रिकॉर्ड बना या नहीं, यदि भुगतान हुआ तो वह किसके खाते में गया, साथ ही अस्पताल के रिकॉर्ड और आयुष्मान पोर्टल में अंतर कैसे आया, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे.

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