CG News: विश्व आदिवासी दिवस पर अंतागढ़ में उमड़ा जनसैलाब, 15 सूत्रीय मांगों को लेकर उठी आवाज

CG News: विश्व आदिवासी दिवस पर अंतागढ़ में उमड़ा जनसैलाब, 15 सूत्रीय मांगों को लेकर उठी आवाज

CG News: विश्व आदिवासी दिवस पर अंतागढ़ में उमड़ा जनसैलाब, 15 सूत्रीय मांगों को लेकर उठी आवाज

CG News: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर अंतागढ़ के उन्मुक्त खेल मैदान में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, ढोल-मांदर की थाप और पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे हजारों लोगों से पूरा मैदान भर गया, आयोजकों के अनुसार करीब 70 से 80 हजार लोग कार्यक्रम में शामिल हुए, इस दौरान आदिवासी संस्कृति, अस्मिता और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया.

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15 सूत्रीय मांगों को लेकर उठी आवाज

कार्यक्रम के मंच से आदिवासी समाज की ओर से 15 सूत्रीय मांगें रखी गईं, इनमें ग्रामसभा की शक्तियों को मजबूत करने, पेसा और वन अधिकार कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने, आदिवासी भूमि की सुरक्षा और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग शामिल रही, इसके साथ ही खनिज संपदा में स्थानीय समुदाय की हिस्सेदारी और आदिवासी संस्कृति एवं धार्मिक पहचान के संरक्षण पर भी जोर दिया गया.

जल-जंगल-जमीन को बताया अधिकारों का आधार

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मण यादव ने कहा कि आदिवासी समाज विकास के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसा विकास चाहता है जिसमें उसके अधिकार और भागीदारी सुरक्षित रहें, उन्होंने जल, जंगल और जमीन को आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान और जीवन पद्धति से जुड़ा बताया, साथ ही कहा कि संविधान में दिए गए अधिकारों का वास्तविक लाभ जमीन पर दिखाई देना चाहिए.

अलग आदिवासी धर्म कोड की मांग

आदिवासी समाज ने आगामी जनगणना में अलग आदिवासी धर्म कोड शामिल करने की मांग भी उठाई, इसके अलावा परिसीमन में आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रखने, अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता देने और आरक्षण का प्रभावी लाभ दिलाने की मांग की गई, समाज ने अवैध रूप से हस्तांतरित आदिवासी भूमि को मूल मालिकों को वापस दिलाने पर भी जोर दिया.

ग्रामसभा की सहमति और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर

आयोजन में भूमि अधिग्रहण, खनन और वन भूमि के उपयोग से जुड़े मामलों में ग्रामसभा की पूर्व सहमति अनिवार्य करने की मांग की गई, खनिज संपदा से मिलने वाले लाभ में स्थानीय समुदाय की भागीदारी और पेसा तथा वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की बात भी रखी गई, देवगुड़ी, देवस्थल, सरना स्थल, गोटूल और घुमकुड़िया जैसे पारंपरिक स्थलों के संरक्षण की मांग के साथ शिक्षा और मातृभाषा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया.

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