CG News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR के बाद सियासी संग्राम, भूपेश बघेल ने सीएम योगी को घेरा

CG News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR के बाद सियासी संग्राम, भूपेश बघेल ने सीएम योगी को घेरा

CG News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR के बाद सियासी संग्राम, भूपेश बघेल ने सीएम योगी को घेरा

CG News: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दर्ज एफआईआर के मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोला है, दल्लीराजहरा जाते समय दुर्ग में मीडिया से चर्चा करते हुए बघेल ने कहा कि महंत और मुख्यमंत्री दोनों ही पूर्णकालिक पद हैं, ऐसे में एक व्यक्ति दोनों जिम्मेदारियां कैसे निभा सकता है, उन्होंने योगी आदित्यनाथ को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह निम्न स्तर की राजनीति है और शास्त्रार्थ की चुनौती भी दी.

बजट सत्र की अवधि पर उठाए सवाल

भूपेश बघेल ने 24 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र को लेकर भी सरकार को घेरा, उन्होंने कहा कि केवल 15 बैठकों का प्रस्तावित सत्र राज्य जैसे बड़े विषयों पर चर्चा के लिए पर्याप्त नहीं है, उन्होंने कहा कि 23 फरवरी को राज्यपाल का अभिभाषण होना है और परंपरा के अनुसार धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होती है, लेकिन 24 फरवरी को ही बजट पेश करने की तैयारी है, बघेल ने सवाल उठाया कि इतनी जल्दबाजी क्यों? क्या सरकार के पास चर्चा के लिए कुछ बचा नहीं है?

एआई समिट और ‘चाइनीज कुत्ता’ विवाद

एआई समिट को लेकर भी बघेल ने सरकार पर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि पूरा एआई समिट एक तरफ और “चाइनीज कुत्ता” विवाद एक तरफ रहा, उन्होंने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को लेकर भी तंज कसा और कार्यक्रम की तैयारियों पर सवाल उठाए.

मेला विवाद और सामाजिक सौहार्द

दुर्ग जिले के देवबलोदा में मेला विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि मेला-मड़ई सबका होता है, किसी भी समुदाय को दुकान लगाने से रोकना सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है, उन्होंने कहा कि, आज मुसलमानों को रोका जा रहा है, कल एससी-एसटी समाज को भी रोका जा सकता है.

शंकराचार्य पर FIR और विवाद की पृष्ठभूमि

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है, एफआईआर में उनके शिष्य मुकुंदानंद का नाम भी शामिल है, विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को माघ मेले के दौरान हुई, जब मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य की पालकी को पुलिस ने संगम जाने से रोक दिया था, इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया, बताया जाता है कि, पालकी को संगम से लगभग 1 किलोमीटर दूर ले जाया गया, जिससे नाराज होकर शंकराचार्य धरने पर बैठ गए थे। बाद में 28 जनवरी को वे वाराणसी लौट गए.

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