CG News : छत्तीसगढ़ में 33/11 केवी सब स्टेशन टेंडर पर सवाल, बिना लेबर लाइसेंस के ठेकेदारों को मिला संचालन

CG News : छत्तीसगढ़ में 33/11 केवी सब स्टेशन टेंडर पर सवाल, बिना लेबर लाइसेंस के ठेकेदारों को मिला संचालन

छत्तीसगढ़ में पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के अंतर्गत आने वाले 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशनों के संचालन से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई ठेकेदारों को अनिवार्य लेबर लाइसेंस जमा किए बिना ही सब स्टेशनों का संचालन सौंप दिया गया, जो श्रम नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, प्रदेशभर में 1500 से अधिक 33/11 केवी सब स्टेशनों के संचालन के लिए टेंडर जारी किया गया था। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में ठेकेदारों ने भाग लिया, लेकिन शुरुआत से ही चयन और शर्तों को लेकर सवाल उठते रहे।

नियमों की अनदेखी का आरोप

टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 23 ठेकेदारों को सब स्टेशनों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई। आरोप है कि इनमें से छह से अधिक ठेकेदारों ने अब तक लेबर लाइसेंस जमा नहीं किया, जबकि पावर कंपनी ने इसके लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की थी।

इसके बावजूद प्रबंधन ने जल्दबाजी दिखाते हुए आबंटन कर दिया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह गहराता जा रहा है।

स्थायी अनुमति की जगह प्रोविजनल मंजूरी

इस बार टेंडर प्रक्रिया में एक और बड़ा बदलाव सामने आया है। पूर्व वर्षों की तरह स्थायी अनुमति देने के बजाय ठेकेदारों को प्रोविजनल अनुमति दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न सिर्फ श्रम कानूनों के उल्लंघन की आशंका बढ़ती है, बल्कि किसी दुर्घटना या विवाद की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो सकता है।

कम टर्नओवर, ज्यादा आबंटन?

टेंडर से जुड़ा एक और विवाद यह है कि करीब 250 सब स्टेशन बेरोजगार इंजीनियरों के लिए आरक्षित किए गए थे। कुछ इंजीनियरों द्वारा जिम्मेदारी न लेने के बाद शेष सब स्टेशन ठेकेदारों को सौंप दिए गए।

आरोप है कि इनमें से कई सब स्टेशन कम टर्नओवर वाले और कथित रूप से पसंदीदा ठेकेदारों को अतिरिक्त रूप से दे दिए गए, जिससे निष्पक्ष चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

टेंडर रद्द करने की मांग

मामले को लेकर विद्युत ठेका श्रमिक संघ, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अजय राय ने केंद्रीय श्रम मंत्री, मुख्यमंत्री और बिजली कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा है। पत्र में टेंडर क्रमांक TR-09 के तहत गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे टेंडर को निरस्त कर नई और पारदर्शी प्रक्रिया से टेंडर जारी करने की मांग की गई है।

आगे क्या?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पावर कंपनी प्रबंधन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामला सरकारी जांच या एजेंसियों के हस्तक्षेप तक पहुंच सकता है। फिलहाल 33/11 केवी सब स्टेशन टेंडर को लेकर छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था और श्रम कानूनों पर बहस तेज हो गई है।

यह भी पढ़ें : AI in Education: छत्तीसगढ़ का विद्या समीक्षा केंद्र बना राष्ट्रीय मॉडल, डेटा और AI से बदली शिक्षा व्यवस्था 

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Circuit not found — Panel21
404 · OPEN CIRCUIT

Nothing wired to this address.

The page you asked for isn't on the panel. Head back to the main bus.

Return home