CG News: गरियाबंद के खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट से कई गुना ज्यादा धान, उठाव की रफ्तार धीमी

CG News: गरियाबंद के खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट से कई गुना ज्यादा धान, उठाव की रफ्तार धीमी

गरियाबंद जिले के धान खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट से 4 से 8 गुना अधिक धान जमा है। नियमों के अनुसार निर्धारित सीमा से अधिक धान का उठाव 72 घंटे के भीतर किया जाना चाहिए, लेकिन कई केंद्रों में महीनों से उठाव नहीं हो पाया है। इससे समितियों में रखरखाव और सूखत (वजन घटने) को लेकर चिंता बढ़ गई है।

50.65 लाख क्विंटल खरीद, उठाव सिर्फ 56%

इस सीजन में जिले में समर्थन मूल्य पर कुल 50,65,726 क्विंटल धान खरीदा गया। अब तक केवल 28,25,888 क्विंटल (56.45%) धान का परिवहन हो सका है। यह पिछले दो वर्षों की तुलना में 15–20% कम बताया जा रहा है। प्रदेश के 33 जिलों में उठाव के मामले में गरियाबंद 15वें स्थान पर है।

समितियों को नुकसान का डर

लंबे समय तक खुले में धान पड़े रहने से गुणवत्ता प्रभावित होने और वजन घटने की आशंका है। नियमों के मुताबिक खरीदी के बाद वजन में कमी की जिम्मेदारी संबंधित केंद्र की मानी जाती है। ऐसी स्थिति में कमीशन में कटौती और वसूली की कार्रवाई हो सकती है।

मिलर्स की कम रुचि बड़ी वजह

जिले में 57 राइस मिलें हैं, लेकिन इस बार केवल 45 मिलर्स को डीओ जारी हुआ है। पिछले एक महीने में 21,17,650 क्विंटल का डीओ जारी हुआ, जबकि उठाव केवल 13,73,110 क्विंटल हुआ। बताया जा रहा है कि मिलर्स के पास पुराना स्टॉक है और बैंक गारंटी की राशि भी अटकी हुई है। साथ ही एफसीआई में चावल रखने की जगह कम होने से भी दिक्कत आ रही है।

भारी वाहनों पर रोक से परिवहन प्रभावित

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 5 फरवरी से उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र में शाम के बाद भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक है। पहले जहां प्रतिदिन करीब 150 ट्रक संग्रहण केंद्र पहुंचते थे, अब यह संख्या आधी रह गई है। इससे उठाव की गति और धीमी हो गई है।

दीवानमुड़ा केंद्र में सबसे कम उठाव

ओडिशा सीमा से लगे दीवानमुड़ा केंद्र में 1,03,519 क्विंटल की रिकॉर्ड खरीदी हुई, लेकिन अब तक केवल 39,460 क्विंटल का परिवहन हो पाया है। 10,800 क्विंटल क्षमता वाले केंद्र में 60 हजार क्विंटल से अधिक धान शेष है।

अधिकारियों का पक्ष

डीएमओ मार्कफेड किशोर चंद्र ने कहा कि सभी केंद्रों के लिए पर्याप्त टीओ और डीओ जारी किए गए हैं, लेकिन सड़क प्रतिबंध और मिलर्स की संख्या कम होने से उठाव प्रभावित है। जिला खाद्य अधिकारी अरविंद दुबे के अनुसार अधिकतम उठाव के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और केंद्रों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।

स्थिति को देखते हुए समितियां जल्द उठाव बढ़ाने की मांग कर रही हैं, ताकि संभावित नुकसान से बचा जा सके।

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