CG News: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का 17 घंटे का प्रदर्शन खत्म, CM साय की ‘पत्थरबाज’ टिप्पणी से गरमाई राजनीति
CG News: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और राज्य सरकार के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है. कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के घेराव के दौरान हुई पत्थरबाजी के बाद शुरू हुआ विवाद अब बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल गया है. कांग्रेस नेताओं पर दर्ज एफआईआर, थाने में 17 घंटे तक चला धरना, और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है.
राजीव भवन घेराव के बाद बढ़ा विवाद
राजीव भवन घेराव के दौरान हुई कथित पत्थरबाजी को लेकर पुलिस ने 12 कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. इसके विरोध में कांग्रेस ने रायपुर के खम्हारडीह थाने का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. देर रात तक कांग्रेस नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस होती रही. पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने करीब 17 घंटे तक थाने में प्रदर्शन किया.
पुलिस और कांग्रेस के बीच बनी सहमति
शुक्रवार सुबह पुलिस अधिकारियों और कांग्रेस प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई. इसके बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी और कांग्रेस ने अपना धरना समाप्त कर दिया. कांग्रेस का कहना है कि प्रशासन ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया है. हालांकि पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर अमल नहीं हुआ, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा.
CM साय की टिप्पणी से बढ़ी सियासत
धरने और पत्थरबाजी के आरोपों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग कश्मीर के पत्थरबाजों जैसी हरकत कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. उनके इस बयान के बाद प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है.
दीपक बैज ने सरकार को दिया अल्टीमेटम
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस ने फिलहाल आंदोलन स्थगित किया है, लेकिन खत्म नहीं किया. उन्होंने कहा कि प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया गया है. यदि तय बिंदुओं पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस फिर से सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी.
अब कार्रवाई पर टिकी सबकी नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस और राज्य सरकार के बीच टकराव को नई दिशा दे दी है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस एक सप्ताह के भीतर क्या कार्रवाई करती है, और क्या उससे कांग्रेस संतुष्ट होती है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति और गरमाने के आसार हैं.