CG News: चाम्पा के रविन्द्र सोनी ने रचा इतिहास, छत्तीसगढ़ी में लिखी श्रीमद्भागवत गीता
CG News: कहते हैं, जब मेहनत, लगन और जुनून हो तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता. चाम्पा के रविन्द्र कुमार सोनी ने अपनी इसी सोच और समर्पण से एक अनोखा काम कर दिखाया है. उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का छत्तीसगढ़ी भाषा में लेखन किया है. छत्तीसगढ़ में पहली बार श्रीमद्भागवत गीता छत्तीसगढ़ी में प्रकाशित हुई है, जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है.
25 साल की मेहनत के बाद पूरा हुआ सपना
रविन्द्र कुमार सोनी की यह उपलब्धि 25 साल की कठिन साधना का परिणाम है. छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद साल 2000 में उनके मन में विचार आया कि श्रीमद्भागवत गीता को छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित किया जाना चाहिए, इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत करते हुए करीब 5 साल में इसकी पांडुलिपि तैयार की. प्रकाशन के लिए उन्होंने कई प्रयास किए और मुंबई के एक प्रकाशक से संपर्क होने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिला.
पेशे से ज्वेलर्स, लेखन में भी बनाई पहचान
चाम्पा के रहने वाले रविन्द्र कुमार सोनी पेशे से ज्वेलर्स हैं. व्यवसाय के साथ ही वे लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं. अब तक उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, श्रीमद्भागवत गीता को छत्तीसगढ़ी में तैयार करने के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. कठिन शब्दों वाली पांडुलिपि की टाइपिंग के लिए कोई तैयार नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होंने खुद कंप्यूटर से इसकी टाइपिंग करने का निर्णय लिया.
तस्वीरों से लेकर कम्पोजिंग तक खुद संभाला काम
पांडुलिपि की टाइपिंग के बाद पुस्तक में शामिल तस्वीरों को तैयार करने की चुनौती सामने आई. रविन्द्र कुमार सोनी ने यह जिम्मेदारी भी खुद निभाई, उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता में उपयोग की गई तस्वीरों को तैयार करने के साथ ही प्रकाशन के लिए कम्पोजिंग में भी योगदान दिया. आखिरकार 25 साल की मेहनत के बाद छत्तीसगढ़ी भाषा में श्रीमद्भागवत गीता प्रकाशित हो गई.
मुख्यमंत्री को भेंट की पुस्तक
रविन्द्र कुमार सोनी ने छत्तीसगढ़ी में तैयार श्रीमद्भागवत गीता की प्रति मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भेंट की. मुख्यमंत्री ने भी उनके इस प्रयास की सराहना की और छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए किए गए इस अनोखे कार्य को प्रोत्साहित करने की बात कही, रविन्द्र कुमार सोनी के इस प्रयास में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिला. परिवार के सदस्यों ने उनके जुनून को समझा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, चाम्पा के लोगों ने भी उनके इस कार्य की जमकर सराहना की है. लोगों का कहना है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा को नई पहचान देने का महत्वपूर्ण काम किया है, जांजगीर-चाम्पा के विधायक ब्यास कश्यप ने भी रविन्द्र कुमार सोनी के प्रयास की प्रशंसा की. उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्हें बधाई दी.