cg News : जिसने देश को 5 सांसद दिए, वो गांव डिजिटल इंडिया से कोसों दूर
cg News : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले का दबेना गांव, जिसने देश को पांच सांसद दिए, आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। यहां के 2,000 से अधिक ग्रामीणों को आज भी छतों या पेड़ों पर चढ़कर मोबाइल पर बात करनी पड़ती है।
सरकारी सेवाएं बाधित
यह गांव 1980 से 1996 तक सांसद रहे अरविंद नेताम और उनकी पत्नी छबिला नेताम (1996) का गृहनगर रहा है। नेताम जी केंद्रीय कृषि मंत्री भी रह चुके हैं, लेकिन उनका गांव अब भी बुनियादी डिजिटल सुविधाओं से अछूता है।
गांव में पटवारी मुख्यालय है लेकिन ऑनलाइन काम जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना का सर्वे, बिजली बिल जमा करना, और बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। ग्राहक सेवा केंद्र के कर्मचारी वाईफाई डिवाइस को हाईमास्ट पोल पर लटकाकर काम करते हैं।
पढ़ाई, स्वास्थ्य, रोजगार सभी प्रभावित
ग्रामीणों को सबसे ज्यादा परेशानी आपातकालीन परिस्थितियों में होती है। गर्भवती महिलाओं या बीमार मरीजों के लिए एम्बुलेंस बुलाना भी किसी चुनौती से कम नहीं। किसी को खबर देने के लिए उन्हें घर तक जाना पड़ता है।
पढ़ाई, स्वास्थ्य, रोजगार सभी प्रभावित
गांव में हाईस्कूल, अस्पताल और सरकारी दफ्तर तो हैं, लेकिन नेटवर्क की कमी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों पर ब्रेक लगा दिया है। ऑनलाइन फॉर्म भरना, परीक्षा की जानकारी लेना तक संभव नहीं हो पा रहा।
प्राइवेट टावर हैं, पर कनेक्टिविटी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों के टावर तो लगे हैं, लेकिन उनकी कनेक्टिविटी बेहद खराब है। लोगों ने सरकार से अपील की है कि दबेना जैसे गांवों में नेटवर्क सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
21वीं सदी का भारत जहां 5G की बात हो रही है, वहीं दबेना जैसे गांव बेसिक नेटवर्क के लिए जूझ रहे हैं। डिजिटल इंडिया का सपना ऐसे क्षेत्रों में तब तक अधूरा रहेगा जब तक इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होता।