CG News: सक्ती में वेदांता पावर प्लांट विवाद फिर हाईकोर्ट पहुंचा, भू-विस्थापितों ने भत्ता और पुनर्वास नहीं मिलने पर दायर की अवमानना याचिका

CG News: सक्ती में वेदांता पावर प्लांट विवाद फिर हाईकोर्ट पहुंचा, भू-विस्थापितों ने भत्ता और पुनर्वास नहीं मिलने पर दायर की अवमानना याचिका

CG News: सक्ती में वेदांता पावर प्लांट विवाद फिर हाईकोर्ट पहुंचा, भू-विस्थापितों ने भत्ता और पुनर्वास नहीं मिलने पर दायर की अवमानना याचिका

CG News: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट से जुड़े भू-विस्थापितों का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया है. प्रभावित परिवारों ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है. याचिका में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास टोपनो और डभरा एसडीएम विनय कश्यप को भी पक्षकार बनाया गया है.

हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप

भू-विस्थापित परिवारों का आरोप है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्हें पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले लाभ नहीं दिए गए. उनका कहना है कि पात्र परिवारों को प्रति माह 10 हजार रुपये भत्ता दिया जाना तय है, लेकिन 50 से 60 महीनों का भुगतान अब तक लंबित है.

2008 के भूमि अधिग्रहण से जुड़ा मामला

यह विवाद वर्ष 2008 में सिंघीतराई स्थित पावर प्लांट के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है. उस समय करीब एक हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी, जिससे 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे. पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत प्रभावित परिवारों को रोजगार या मासिक भत्ते का प्रावधान किया गया था.

प्लांट शुरू हुआ, लेकिन नहीं मिला लाभ

प्लांट का संचालन पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से शुरू हुआ था. वर्ष 2016 में यह बंद हो गया और बाद में 2022 में वेदांता ग्रुप ने इसका अधिग्रहण किया. वर्ष 2025 में प्लांट दोबारा शुरू हुआ, लेकिन भू-विस्थापितों का आरोप है कि 400 से अधिक परिवारों को अब तक न रोजगार मिला और न ही भत्ते का लाभ.

पहले भी पहुंचा था मामला हाईकोर्ट

वर्ष 2021 में 37 प्रभावित परिवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पात्र परिवारों को नियमानुसार लाभ देने के निर्देश दिए थे. इसके बाद प्रशासन की समिति और सक्ती कलेक्टर ने भी कंपनी प्रबंधन को आदेश का पालन करने के लिए पत्र जारी किया था, लेकिन प्रभावित परिवारों का आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

अधिकारों की मांग

भू-विस्थापित किसान रेशम लाल यादव का कहना है कि कंपनी ने जमीन अधिग्रहण के समय रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन वर्षों बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि कई महीनों का भत्ता भी बकाया है और प्रभावित परिवार अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं. अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और इस मामले में होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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