CG News: राज्य में सरेंडर अभियान जारी, शीर्ष नेताओं के सरेंडर की आशंका

CG News: राज्य में सरेंडर अभियान जारी, शीर्ष नेताओं के सरेंडर की आशंका

CG News: राज्य में सरेंडर अभियान जारी, शीर्ष नेताओं के सरेंडर की आशंका

CG News: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का सरेंडर अभियान लगातार जारी है,आशंका है कि गुरुवार को भी बड़ी संख्या में नक्सली सरेंडर कर सकते हैं,इससे पहले बुधवार को भी बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हथियार डाल दिए थे,छत्तीसगढ़ में लाल आतंक अब अपने आखिरी दौर में नजर आ रहा है.

सीनियर माओवादियों के सरेंडर की आशंका

एक के बाद एक बड़े नक्सली कमांडरों के ढेर होने के बाद, अब नक्सली खुद मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर रहे हैं,पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर किया है, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है,खास बात यह है कि सीनियर माओवादी नेता रुपेश और रनिता भी सरेंडर कर सकते हैं,दोनों नेताओं के साथ बातचीत आखिरी दौर में पहुंच चुकी है, और कभी भी औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण हो सकता है और अगर ऐसा होता है, तो यह नक्सल संगठनों के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा, क्योंकि रुपेश और रनिता दोनों माओवादी संगठन के शीर्ष नेता हैं,इससे पहले भी माओवादी रणनीतिकार मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू या भूपति ने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया था.

100 नक्सलियों का आत्मसमर्पण

कांकेर जिले में हाल हीं में 100 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें टॉप कमांडर राजू सलाम, कमांडर प्रसाद और मीना के नाम प्रमुख हैं,राजू सलाम डिवीजनल कमेटी मेंबर था और नक्सल संगठन में नंबर 5 का कमांडर माना जाता था,बताया जाता है कि पिछले 20 वर्षों में हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं में राजू सलाम की भूमिका रही है,इसी तरह कमांडर प्रसाद और मीना भी नक्सल संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर थे और संगठन को संसाधन उपलब्ध कराते थे,बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने सरेंडर को लेकर बड़ी जानकारी दी है,उन्होंने बताया कि पिछले 20 महीनों में अब तक 1,876 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, और ये सभी पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं,आईजी का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी नक्सलियों का सरेंडर संभव है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म करने की डेडलाइन तय कर दी है,इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बलों और पुलिस का अभियान तेज़ किया गया है,इसके साथ ही, राज्य और केंद्र सरकारें नक्सलियों के पुनर्वास के लिए कई नीतियाँ चला रही हैं,सरकार की सख्त रणनीति और पुनर्वास नीतियों के चलते लाल आतंक का दौर खत्म होने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा चुका है.

Related Post

Circuit not found — Panel21
404 · OPEN CIRCUIT

Nothing wired to this address.

The page you asked for isn't on the panel. Head back to the main bus.

Return home