CG News: कोविड में रद्द हुई TET परीक्षा तो अभ्यर्थी को नहीं मिलेगा नुकसान, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

CG News: कोविड में रद्द हुई TET परीक्षा तो अभ्यर्थी को नहीं मिलेगा नुकसान, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

CG News: कोविड में रद्द हुई TET परीक्षा तो अभ्यर्थी को नहीं मिलेगा नुकसान, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा TET को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है. कोर्ट ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण परीक्षा रद्द होने से यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय में आवश्यक योग्यता पूरी नहीं कर पाया, तो उसे अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब देरी प्रशासनिक कारणों से हुई हो, तो उसका नुकसान अभ्यर्थी को नहीं दिया जा सकता.

क्या था पूरा मामला

यह मामला एक ऐसे अभ्यर्थी से जुड़ा था, जिसके पिता सहायक शिक्षक एलबी के पद पर कार्यरत थे. पिता की मृत्यु के बाद बेटे ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, याचिकाकर्ता ने डीएलएड की योग्यता पूरी कर ली थी और वर्ष 2020 में होने वाली TET परीक्षा के लिए आवेदन भी किया था. लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी, बाद में आयोजित TET परीक्षा में अभ्यर्थी सफल हो गया, लेकिन अधिकारियों ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि उसने निर्धारित तीन साल की अवधि में आवश्यक योग्यता हासिल नहीं की.

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि वर्ष 2017 से मार्च 2020 के बीच TET परीक्षा आयोजित हुई थी, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसमें कोविड काल की अवधि को कई मामलों में समय सीमा की गणना से बाहर रखने की बात कही गई थी, हाईकोर्ट ने अधिकारियों के पुराने आदेश को रद्द करते हुए संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर दोबारा विचार करे, कोर्ट ने इसके लिए 45 दिनों की समय सीमा तय की है और कहा है कि मामले का निर्णय कानून के अनुसार किया जाए.

क्या होती है अनुकंपा नियुक्ति

अनुकंपा नियुक्ति सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है, इसका उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक आई आर्थिक परेशानी से राहत देना होता है. यह सामान्य भर्ती प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि विशेष परिस्थितियों में दी जाने वाली सहायता होती है, हाईकोर्ट के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो कोविड महामारी के कारण परीक्षाओं में देरी या रद्द होने की वजह से समय पर आवश्यक योग्यता हासिल नहीं कर पाए थे.

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