CG News: त्योहारों से पहले बढ़ी महंगाई, प्याज-शक्कर के दाम ने बिगाड़ा बजट, अब किलो की जगह पाव में खरीदारी
CG News: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले ही बाजार में महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. करीब 15 दिन पहले 20 रुपए किलो बिकने वाला प्याज अब कई जगह 60 रुपए किलो तक पहुंच गया है. इसी तरह शक्कर के दाम भी 44 रुपए से बढ़कर करीब 70 रुपए किलो हो गए हैं. सब्जियों और रोजमर्रा के राशन की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के घरेलू बजट पर पड़ रहा है.
सब्जी बाजार में ग्राहक कम
महंगे दामों के कारण बाजार में सब्जी खरीदने पहुंचे लोग पहले कीमत पूछ रहे हैं और फिर जरूरत के मुताबिक कम मात्रा में सामान ले रहे हैं. कई परिवारों ने किलो की जगह पाव या आधा किलो में खरीदारी शुरू कर दी है. गृहणियों का कहना है कि पहले सीमित बजट में कई दिनों की सब्जी आ जाती थी, लेकिन अब उतनी ही रकम में दो-तीन दिन की जरूरत पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है. बच्चों के टिफिन और रोजमर्रा की चाय जैसी छोटी जरूरतों पर भी महंगाई का असर दिखाई दे रहा है.
कीमत का असर ज्यादा
महंगाई से निपटने के लिए कुछ कंपनियों ने पैकेजिंग में बदलाव किया है. बाजार में कई उत्पाद ऐसे पैक में दिखाई दे रहे हैं, जिनकी मात्रा पहले के मुकाबले कम है, लेकिन पैकेट की कीमत लगभग वही रखी गई है. उदाहरण के तौर पर 1000 एमएल की जगह 850, 900 या 910 एमएल के पाउच बाजार में मिल रहे हैं. छोटे पैकेट में भी मात्रा कम किए जाने से ग्राहकों को सीधे कीमत बढ़ने का अहसास नहीं होता, लेकिन प्रति लीटर या प्रति किलो वास्तविक लागत बढ़ जाती है.
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
आने वाले दिनों में लगातार त्योहार होने के कारण घरेलू खर्च और बढ़ने की संभावना है. रक्षाबंधन के बाद गणेश उत्सव, नवरात्रि और फिर दीपावली जैसे पर्व आने हैं. ऐसे में खाद्य सामग्री की कीमतों में तेजी ने परिवारों का बजट प्रभावित किया है. खासकर शक्कर और प्याज जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं के महंगे होने से त्योहारों की तैयारी का खर्च भी बढ़ रहा है.
सब्जियों में राहत की उम्मीद
व्यापारियों के मुताबिक बारिश का दौर थमने पर हरी सब्जियों की आवक बेहतर हो सकती है और अगले 10 से 15 दिनों में इनके दाम में कुछ कमी आने की उम्मीद है. हालांकि प्याज और शक्कर की कीमतों को लेकर फिलहाल ज्यादा राहत के संकेत नहीं हैं. महंगाई के बीच उपभोक्ताओं को अब बाजार में खरीदारी से पहले कीमतों की तुलना करनी पड़ रही है और कम मात्रा में सामान खरीदकर घरेलू बजट संभालने की कोशिश की जा रही है.
यह भी पढ़ें : CG News: बस्तर में बदले सियासी समीकरण, राहुल गांधी के दौरे की तैयारी में कांग्रेस, आदिवासी मुद्दों पर बनेगी रिपोर्ट