CG News: छत्तीसगढ़ में कोयले की कमी से बिजली संकट का खतरा, HTPS की एक यूनिट बंद, बाकी पर भी मंडराया संकट
CG News: छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित दर्री HTPS पावर प्लांट में कोयले का संकट गहराता नजर आ रहा है. बारिश के मौसम में प्लांट में करीब 5 लाख मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक होना जरूरी माना जाता है, लेकिन मौजूदा समय में केवल तीन दिन के संचालन के लिए ही कोयला बचा है. प्लांट की रोजाना जरूरत करीब 20 हजार मीट्रिक टन है, जबकि बारिश के कारण SECL की खदानों से प्रतिदिन सिर्फ 3 से 4 हजार मीट्रिक टन कोयला ही पहुंच पा रहा है. इससे बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है.
210 मेगावाट की एक यूनिट पहले ही बंद
कोयले की कमी का असर अब पावर प्लांट के संचालन पर दिखाई देने लगा है. 210 मेगावाट क्षमता वाली एक यूनिट को पहले ही बंद किया जा चुका है. यदि कोयले की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो बाकी इकाइयों के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका है. इसी बीच आरोप लगाए जा रहे हैं कि जानबूझकर संकट की स्थिति पैदा कर सरकारी बिजली संयंत्रों के निजीकरण का माहौल तैयार किया जा रहा है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
कोटा प्लांट में भी सिर्फ 5 दिन का स्टॉक
कोयले की कम आवक का असर कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट पर भी पड़ा है. छत्तीसगढ़ और सिंगरौली क्षेत्र की कोयला खदानों में बारिश का पानी भरने से आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसके चलते कोटा प्लांट में करीब पांच दिन का कोयला स्टॉक ही बचा है. यहां 1240 मेगावाट क्षमता की सात इकाइयों के संचालन के लिए प्रतिदिन करीब 12 से 15 हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत पड़ती है. लगातार कम आपूर्ति से बिजली उत्पादन व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है.
बारिश बनी कोयला आपूर्ति में बड़ी बाधा
मानसून के दौरान कोयला खदानों में पानी भरने और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से बिजली संयंत्रों तक ईंधन की आपूर्ति चुनौती बन जाती है. सामान्य स्थिति में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना जरूरी होता है, लेकिन मौजूदा हालात में कई संयंत्रों में रिजर्व तेजी से कम हो रहा है. यदि खदानों से कोयले की आपूर्ति जल्द नहीं बढ़ी, तो बिजली उत्पादन और ग्रिड पर इसका असर पड़ने की चिंता बढ़ सकती है. ऐसे में पावर प्लांटों के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराना प्राथमिकता बन गया है.
देश के लिए भी महत्वपूर्ण है छत्तीसगढ़ का कोयला
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है और राष्ट्रीय बिजली व्यवस्था में इसकी अहम भूमिका है. राज्य में हर साल 20 करोड़ टन से ज्यादा कोयले का उत्पादन होता है और देश के कुल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी के आसपास बताई जाती है. ऐसे में राज्य के बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ स्थानीय बिजली आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा. आने वाले दिनों में SECL से कोयले की आवक और पावर प्लांटों के स्टॉक पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा.
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