CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 121 स्ट्रीट वेंडर्स को मिला सुनवाई का अधिकार
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नगर निगम किसी स्ट्रीट वेंडर को बिना वैधानिक सर्वे और सुनवाई का अवसर दिए उसकी जगह से नहीं हटा सकता. बिलासपुर के कोनी क्षेत्र में ठेला और गुमटी लगाकर कारोबार करने वाले 121 छोटे व्यापारियों को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है.
121 दुकानदारों को जारी हुआ था नोटिस
मामला बिलासपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 8 के कोनी क्षेत्र का है. यहां कारोबार करने वाले 121 स्ट्रीट वेंडर्स को बेदखली का नोटिस दिया गया था. कोनी व्यापारी कल्याण संघ ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दुकानदार लंबे समय से कारोबार कर रहे हैं और उनकी दुकानें मुख्य सड़क से करीब 10 से 15 फीट पीछे हैं, जिससे यातायात प्रभावित नहीं होता.
कोर्ट ने पहले सर्वे का दिया निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निगम को पहले कानून के अनुसार सभी 121 वेंडर्स का विधिवत सर्वे कराना होगा. इसके बाद उचित वेंडिंग जोन निर्धारित किया जाए और फिर पुनर्वास या जगह आवंटन पर नियमानुसार फैसला लिया जाए. कोर्ट ने प्रभावित दुकानदारों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देने के भी निर्देश दिए हैं.
90 दिनों में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने नगर निगम को आदेश की प्रति मिलने के बाद 90 दिनों के भीतर संबंधित प्रक्रिया पूरी करने को कहा है. इस अवधि में वेंडर्स को दी गई अंतरिम राहत जारी रहेगी. निगम की ओर से दुकानदारों को तुर्काडीह पुल के पास वैकल्पिक जगह देने की बात कही गई थी, जबकि व्यापारियों का कहना था कि उन्हें पहले कानूनी प्रक्रिया के तहत संरक्षण और सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए.
स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट देता है कानूनी सुरक्षा
स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 का उद्देश्य रेहड़ी, ठेला और छोटे कारोबारियों की आजीविका को कानूनी सुरक्षा देना है. कानून के तहत स्थानीय निकायों को वेंडर्स का सर्वे कराने, वेंडिंग जोन तय करने और पात्र लोगों को प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था है. जरूरत पड़ने पर विस्थापन से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन और पुनर्वास पर विचार करना होता है. हाईकोर्ट के फैसले से कोनी के 121 कारोबारियों को फिलहाल राहत मिली है.
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