CG News: प्याज और शक्कर की कीमतों में तेजी, त्योहारों से पहले बिगड़ सकता है घरेलू बजट

CG News: प्याज और शक्कर की कीमतों में तेजी, त्योहारों से पहले बिगड़ सकता है घरेलू बजट

CG News: प्याज और शक्कर की कीमतों में तेजी, त्योहारों से पहले बिगड़ सकता है घरेलू बजट

CG News: रसोई गैस की कीमतों और उपलब्धता को लेकर राहत के बीच अब प्याज और शक्कर के बढ़ते भाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले कुछ दिनों में प्याज की कीमत में तेजी से बदलाव आया है. करीब एक सप्ताह पहले 35 से 40 रुपए किलो बिकने वाला प्याज अब खुदरा बाजार में 50 से 55 रुपए किलो तक पहुंच गया है. थोक बाजार में भी इसके भाव बढ़कर करीब 40 से 42 रुपए किलो हो गए हैं.

फसल कमजोर होने से घट गई आवक

थोक कारोबारियों के अनुसार इस साल प्याज का उत्पादन कई इलाकों में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. कुछ क्षेत्रों में फसल प्रभावित होने के साथ पुराने स्टॉक का एक हिस्सा भी खराब हो गया. बारिश के कारण बाजार तक प्याज की आवक पर भी असर पड़ा है. कारोबारियों को उम्मीद है कि सितंबर में दक्षिण भारत से नई खेप आने के बाद कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है, जबकि नवंबर-दिसंबर में नई फसल की आवक बढ़ने पर भाव और नीचे आने की संभावना है.

होटल और भोजनालयों की लागत बढ़ी

प्याज की कीमत बढ़ने का असर घरों के साथ होटल, रेस्टोरेंट और भोजनालयों पर भी पड़ रहा है. कई व्यंजनों में प्याज का इस्तेमाल होने के कारण इसकी कीमत बढ़ने से भोजन तैयार करने की लागत बढ़ जाती है. यदि बाजार में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो कारोबारियों को आगे चलकर खाने-पीने की चीजों के दाम में बदलाव करना पड़ सकता है.

शक्कर 71 रुपए किलो तक पहुंची

प्याज के साथ शक्कर की कीमत में भी तेजी देखने को मिल रही है. बाजार में शक्कर का भाव करीब 71 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है. त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले शक्कर महंगी होने का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ सकता है. मिठाई कारोबारियों के मुताबिक काजू, बादाम और अन्य सामग्री की कीमत बढ़ने से पहले ही उत्पादन लागत पर दबाव है.

दालों पर भी महंगाई का असर

चना, अरहर और उड़द जैसी दालों की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है. कमजोर मानसून और कुछ क्षेत्रों में कम बुवाई को इसकी एक वजह माना जा रहा है. हालांकि स्थानीय थोक कारोबारियों के मुताबिक फिलहाल दालों में बड़ी तेजी नहीं आई है. वहीं कारोबारियों ने प्याज और शक्कर की कीमत बढ़ने के पीछे जमाखोरी से इनकार किया है और उम्मीद जताई है कि नई फसल की आवक बढ़ने के बाद नवंबर-दिसंबर तक बाजार में राहत मिल सकती है.

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