CG News: महादेव सट्टा ऐप के आरोपी सौरभ चंद्राकर को 8 दिन की CBI रिमांड, दिल्ली ले जाकर होगी पूछताछ
CG News: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को रायपुर की CBI कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई के बाद अदालत ने CBI को उससे पूछताछ के लिए 8 दिन की कस्टोडियल रिमांड मंजूर की है. अब CBI की टीम सौरभ को दिल्ली ले जाएगी, जहां एजेंसी के कार्यालय में उससे पूछताछ की जाएगी. उसे 12 नवंबर को दोबारा अदालत में पेश करना होगा.

ED ने भी रिमांड के लिए दिया आवेदन
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से दलीलें पेश की गईं. इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के अधिकारी और वकील भी अदालत में मौजूद रहे. ED ने भी सौरभ चंद्राकर की रिमांड के लिए आवेदन लगाया है. वहीं, आरोपी के वकील तुषार गिरी ने CBI की रिमांड मांग का विरोध करते हुए इसे गलत बताया. सौरभ की पेशी को देखते हुए कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी और भारी पुलिस बल तैनात रहा, करीब 6 हजार करोड़ रुपये के कथित सट्टा घोटाले में आरोपी सौरभ चंद्राकर को मंगलवार को CBI की टीम दिल्ली से फ्लाइट E6 2307 के जरिए रायपुर लेकर पहुंची थी. इससे पहले ओमान से प्रत्यर्पण के बाद उसे भारत लाया गया था. सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में उसकी पेशी हुई थी, जहां अदालत ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर उसे CBI को सौंपने का आदेश दिया था.
वकील का दावा, सौरभ अब भी भारतीय नागरिक
सौरभ चंद्राकर के वकील तुषार गिरी ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपनी नागरिकता नहीं बदली है और वह भारतीय नागरिक हैं. उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार ने ओमान सरकार से सौरभ की नागरिकता को लेकर जानकारी मांगी थी और वहां से स्पष्ट किया गया कि वह भारतीय नागरिक है. वकील के मुताबिक, उनके पक्ष का मानना है कि सौरभ के खिलाफ ED के मामले में ही कार्रवाई हो सकती है, जबकि CBI के मामले में उसके खिलाफ कार्रवाई का आधार नहीं बनता.

प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर CBI की कार्रवाई पर सवाल
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने ओमान की अदालत के आदेश का हवाला देते हुए प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर सवाल उठाए. वकील ने दलील दी कि भारत की ओर से ओमान को भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध में ED के मामले को मंजूरी मिली थी, जबकि CBI के मामले को मंजूरी नहीं दी गई थी. उनका कहना था कि प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार सौरभ के खिलाफ उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जा सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत लाया गया है. इसी आधार पर उन्होंने CBI की रिमांड मांग का विरोध किया.
सट्टा ऐप को लेकर वकील ने दी यह दलील
महादेव ऐप के जरिए भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर भी तुषार गिरी ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि यह एक सट्टे का ऐप है और अलग-अलग मामलों को देखने का नजरिया भी अलग हो सकता है. उन्होंने मीडिया में सौरभ की नागरिकता और अन्य पहलुओं को लेकर प्रसारित खबरों को निराधार बताया. हालांकि, ये बचाव पक्ष की दलीलें हैं, मामले में जांच एजेंसियों के आरोपों पर अदालत में सुनवाई जारी है.
पूछताछ में और नाम सामने आने की उम्मीद, CM साय
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मुख्य आरोपी को पकड़कर भारत लाया गया है. CBI की पूछताछ में इस मामले से जुड़े कई और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं. कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने स्वार्थ के लिए लोकतंत्र की हत्या की और आज वही लोकतंत्र की बात कर रही है, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कांग्रेस भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सौरभ को भारत लाकर रायपुर पहुंचा दिया गया है, लेकिन रवि उप्पल और शुभम सोनी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. बैज ने सवाल किया कि 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान महादेव ऐप को लेकर वीडियो जारी करने वाले शुभम सोनी का अब तक पता क्यों नहीं चल पाया है.
कांग्रेस सरकार के दौरान 72 से ज्यादा FIR दर्ज होने का दावा
दीपक बैज ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान महादेव ऐप मामले में 72 से अधिक FIR दर्ज की गई थीं. उन्होंने कहा कि उस समय छापेमारी और गिरफ्तारियां भी हुई थीं. बैज के मुताबिक, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महादेव ऐप को गूगल प्ले स्टोर से हटाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामलों की जांच CBI और ED कर रही हैं. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से संबंधित 13 FIR जांच के लिए CBI को सौंपी थीं. एजेंसी के मुताबिक, इनमें से दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. वहीं ED मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच कर रही है और सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है.
2022 में दर्ज FIR से जुड़ा है मामला
CBI के मुताबिक, महादेव बुक ऐप को सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर प्रमोट किया था. जांच एजेंसी का आरोप है कि ऑनलाइन सट्टे के संचालन के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म और पैनल तैयार किए गए थे. इनके जरिए सट्टा संचालित होता था और इससे मिलने वाली रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी, जांच एजेंसी का आरोप है कि सट्टे से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से इकट्ठा करने के बाद UAE तक पहुंचाया जाता था. सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों पर दुबई से इस नेटवर्क को संचालित करने का आरोप है. जांच में छत्तीसगढ़ के कई युवाओं को इस नेटवर्क में कर्मचारी और मैनेजर के तौर पर काम पर रखने की बात भी सामने आई है. अब CBI की पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर जानकारी जुटाई जाएगी.
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