CG News : छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति पर लगी रोक हटी, हाईकोर्ट ने सरकार की नीति को बताया सही
CG News : छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग के प्राचार्य पदों पर पदोन्नति का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो गया है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को राज्य शासन की प्रमोशन नीति को सही ठहराते हुए उस पर लगी स्थगन (स्टे) को हटा दिया है। कोर्ट ने इस संबंध में दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिससे लगभग 3500 स्कूलों में जल्द प्राचार्यों की नियुक्ति का रास्ता खुल गया है।
डिवीजन बेंच ने सुनाया फैसला
करीब 15 दिन पहले जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस ए.के. प्रसाद की डिवीजन बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था। अब मंगलवार को यह आदेश जारी कर दिया गया है, जिसमें कोर्ट ने राज्य शासन की प्रमोशन प्रक्रिया को वैध ठहराया है।
बीएड की अनिवार्यता और वरिष्ठता पर बहस
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने बीएड डिग्री की अनिवार्यता को चुनौती दी थी और माध्यमिक स्कूलों के प्रधान पाठकों से व्याख्याता बने शिक्षकों की वरिष्ठता का मुद्दा भी उठाया था। कुछ याचिकाएं वर्ष 2019 से संबंधित थीं, वहीं अन्य 2025 में बीएड और डीएलएड योग्यता को लेकर दायर की गई थीं। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि प्रमोशन प्रक्रिया में सभी श्रेणियों के शिक्षकों के हितों का ध्यान रखा गया है।पहले कोर्ट ने यह पाया था कि उसके आदेश के बावजूद कुछ शिक्षकों को पदोन्नति देकर ज्वाइनिंग दी गई थी, जिसे न्यायालय ने अवमानना मानते हुए सभी नियुक्तियों पर तत्काल रोक लगा दी थी। लेकिन अब स्थगन आदेश हटा दिया गया है, जिससे प्रमोशन सूची के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
शिक्षकों को मिला हक: संजय शर्मा
शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा कि व्याख्याता संवर्ग के शिक्षकों को अपने हक के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। 30 अप्रैल को जारी प्रमोशन सूची पर 1 मई को स्टे लग गया था। अब जब कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर दी हैं, तो राज्य सरकार को तत्काल नियुक्ति आदेश जारी करने चाहिए, ताकि नए शिक्षा सत्र के प्रारंभ से पहले प्राचार्य स्कूलों में कार्यभार संभाल सकें।