CG News: छत्तीसगढ़ की जर्जर सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार और नगर निगम को लगाई कड़ी फटकार
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने प्रदेश की जर्जर सड़कों और नगर निगमों की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाया है, सड़कों की दुर्दशा को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2021 से मामला लंबित होने के बावजूद सड़कों, खासकर बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की हालत में अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है.
PWD और NHAI के रवैये पर जताई हैरानी
सुनवाई के दौरान सेंदरी-मोपका बाईपास को लेकर सामने आई स्थिति पर हाईकोर्ट ने हैरानी जाहिर की, एनएचएआई (NHAI) द्वारा पेश शपथ पत्र में बताया गया कि यह सड़क अभी तक उन्हें सौंपी ही नहीं गई है और यह लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकार क्षेत्र में है, इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है जैसे राज्य सरकार इस परियोजना को पूरा करने या एनएचएआई को सौंपने में रुचि नहीं ले रही है.
बिलासपुर नगर निगम आयुक्त तलब
मामले में बिलासपुर नगर निगम की ओर से किसी अधिवक्ता के उपस्थित न होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने या प्रतिनिधि भेजने के निर्देश दिए हैं, इसके साथ ही कोर्ट ने आगामी त्योहारों को देखते हुए सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने और अब तक उठाए गए कदमों की रिपोर्ट 14 अक्टूबर 2026 तक शपथ पत्र के माध्यम से पेश करने का आदेश दिया है.
एक भी सड़क चलने लायक नहीं होने का दावा
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव ने बिलासपुर की सड़कों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शहर की एक भी सड़क ऐसी नहीं है जिसे सुरक्षित या चलने योग्य कहा जा सके, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूजा पर्व से पहले सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई तो बड़े हादसे हो सकते हैं, इसके साथ ही कोर्ट ने एनएचएआई से बिलासपुर-रायपुर सड़क प्रोजेक्ट पूरा करने की समय-सीमा पर भी रिपोर्ट मांगी है.
डामर की दरें बढ़ने से 50 करोड़ के प्रोजेक्ट पर फंसा पेंच
दूसरी ओर नगर निगम की लगभग 12 किलोमीटर लंबी 5 प्रमुख सड़कों (अशोक नगर रोड, अपोलो रोड, अरपा अटल पथ आदि) का काम डामरीकरण के स्तर पर आकर अटक गया है, डामर की कीमतें बढ़ने का हवाला देते हुए ठेकेदारों ने स्वीकृत एस्टीमेट को रिवाइज करने की मांग की है, लगभग 50 करोड़ रुपये लागत वाली इन परियोजनाओं का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जहां से निर्देश मिलने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा.
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