CG News: सरगुजिहा बोलने पर नहीं मिला एडमिशन, स्कूल की मान्यता रद्द और 1 लाख जुर्माना
CG News: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक प्राइवेट स्कूल द्वारा कथित तौर पर स्थानीय बोली बोलने के कारण बच्चे को एडमिशन से इनकार करने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। जांच में स्कूल का संचालन बिना मान्यता के पाया गया, जिसके बाद उसकी मान्यता रद्द कर दी गई और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, एक अभिभावक अपने 4 वर्षीय बेटे का एडमिशन कराने प्री-प्राइमरी स्कूल “स्वरंग किड्स एकेडमी” पहुंचे थे। डेमो क्लास के दौरान बच्चे ने सरगुजिहा बोली में जवाब दिए, जिसके बाद स्कूल ने एडमिशन देने से इनकार कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने यह कहकर प्रवेश नहीं दिया कि यहां बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं और वे इस बोली को सीख जाएंगे।
जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही
मामले की शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत से की गई, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहा था, इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा ने स्कूल की मान्यता रद्द कर दी और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
भाषा के आधार पर भेदभाव गैरकानूनी
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि भाषा के आधार पर भेदभाव करना शिक्षा का अधिकार कानून के खिलाफ है। स्कूल को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं, इस मामले पर टी एस सिंहदेव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी बच्चे को उसकी भाषा के कारण प्रवेश नहीं दिया जाता है, तो ऐसे संस्थान को बंद कर देना चाहिए।
NSUI ने भी जताया विरोध
छात्र संगठन NSUI ने भी इस घटना का विरोध करते हुए स्कूल का पंजीयन रद्द करने की मांग की थी और इसे स्थानीय बोली का अपमान बताया, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही अन्य प्रभावित बच्चों को भी वैकल्पिक स्कूलों में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरे स्कूल ने बढ़ाया मदद का हाथ
घटना के बाद राहत की खबर भी सामने आई। “बचपन प्ले स्कूल” ने बच्चे को मुफ्त में एडमिशन देकर पढ़ाई का अवसर दिया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि शिक्षा में भाषा के आधार पर भेदभाव पूरी तरह गलत है।