CG News :  बरमकेला को लेकर भूपेश बघेल और ओपी चौधरी में जुबानी जंग, सौतेले व्यवहार बनाम विकास की सियासत गरमाई

CG News : की राजनीति में एक बार फिर विकास और सुविधाओं के मुद्दे पर जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बार मैदान बना है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का बरमकेला ब्लॉक, जहां कथित "सौतेले व्यवहार" को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं।

CG News :  बरमकेला को लेकर भूपेश बघेल और ओपी चौधरी में जुबानी जंग, सौतेले व्यवहार बनाम विकास की सियासत गरमाई

CG News : की राजनीति में एक बार फिर विकास और सुविधाओं के मुद्दे पर जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बार मैदान बना है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का बरमकेला ब्लॉक, जहां कथित “सौतेले व्यवहार” को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं।

भूपेश बघेल का तंज – सौतेला व्यवहार और विरोध की चेतावनी

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बरमकेला की शिकायतों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का ज्ञापन साझा करते हुए लिखा:
“सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला के लोग शिकायत कर रहे हैं कि राज्य सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। अगर यही चलता रहा तो ओपी चौधरी के कार्यक्रमों का बहिष्कार और काले झंडे दिखाए जाएंगे।”
बघेल ने सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की अपील भी की।

ओपी चौधरी का पलटवार – कांग्रेस ने नहीं दिया विकास

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पर करारा हमला बोला। उन्होंने लिखा:
“कांग्रेस को सरिया और बरमकेला में 50 साल तक मौका मिला। आपने अपने शासन में 100 बिस्तर का अस्पताल तक नहीं खोला, न ही रजिस्ट्री कार्यालय। अब जब हम कुछ कर रहे हैं, तो पेट में दर्द हो रहा है।”
चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरिया में शुरू की गई सुविधाएं बरमकेला से शिफ्ट नहीं की गईं, बल्कि नई योजनाएं शुरू की गई हैं।

क्या है मामला?

बरमकेला के लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है और सरिया को तरजीह दी जा रही है। वहीं सरकार का दावा है कि दोनों क्षेत्रों को समान रूप से लाभ पहुंचाया जा रहा है।

सियासी तापमान चढ़ा, जनता के सवाल बाकी

यह मुद्दा अब केवल विकास बनाम सौतेला व्यवहार नहीं रहा, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता जा रहा है। कांग्रेस जहां अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, वहीं भाजपा विकास के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है।
अब देखना यह होगा कि यह सियासी बहस जमीनी स्तर पर क्या असर डालती है—क्या जनता को वाकई सुविधाएं मिलेंगी या यह बहस महज़ सोशल मीडिया तक सीमित रह जाएगी?

बरमकेला बनाम सरिया की सियासत ने छत्तीसगढ़ में चुनावी जमीन को एक बार फिर गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और कितना बड़ा रूप लेता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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