CG News: भरण-पोषण केस में पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे की आय जानने का अधिकार

CG News: भरण-पोषण केस में पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे की आय जानने का अधिकार

CG News: भरण-पोषण केस में पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे की आय जानने का अधिकार

CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए पति-पत्नी की आय को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद और भरण-पोषण के मामलों में पति को पत्नी की कमाई के बारे में जानकारी हासिल करने का अधिकार है. इसी तरह पत्नी भी पति की आय से संबंधित जानकारी मांग सकती है. यह मामला दुर्ग फैमिली कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है.

रायपुर की महिला ने फैमिली कोर्ट में मांगा था भरण-पोषण

मामला रायपुर निवासी एक महिला से संबंधित है, जिसने दुर्ग फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था. सुनवाई के दौरान पत्नी की आय से जुड़े कुछ सवालों पर फैमिली कोर्ट ने रोक लगा दी थी. पति ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और दलील दी कि पत्नी की आय से संबंधित जानकारी को मामले में सामने लाना जरूरी है. इसी याचिका पर हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की आय से जुड़ी जानकारी के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट की.

11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण से जुड़े विवाद में दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति महत्वपूर्ण होती है. ऐसे मामलों में पति और पत्नी को एक-दूसरे की आय के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है. कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तारीख तय की है. अब अगली सुनवाई में इस विवाद से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी सुनवाई होने की संभावना है.

पत्नी ज्यादा कमाती हो, फिर भी खर्च देने का आदेश

भरण-पोषण से जुड़े एक अन्य मामले में भी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट महत्वपूर्ण टिप्पणी कर चुका है. सुरजपुर फैमिली कोर्ट के आदेश को पति ने चुनौती दी थी, जिसमें उसे पत्नी के मुकदमे से जुड़े खर्च का भुगतान करने के लिए कहा गया था. पति की दलील थी कि उसकी पत्नी सरकारी शिक्षिका है और उसकी आय उससे अधिक है. इसके बावजूद हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी थी.

मुकदमे और यात्रा के खर्च पर भी कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने उस मामले में कहा था कि पत्नी की आय पति से ज्यादा होने मात्र से पति की कानूनी खर्च की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. कोर्ट ने मुकदमे और यात्रा से जुड़े खर्च का भुगतान करने के आदेश को बरकरार रखा था. इन दोनों मामलों से यह स्पष्ट होता है कि भरण-पोषण और वैवाहिक विवादों में पति-पत्नी की वास्तविक आर्थिक स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका रखती है.

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