धरसींवा के तालाब बनेंगे बर्ड वॉचिंग सेंटर, 5 गांवों में शुरू हुआ निरीक्षण
धरसींवा क्षेत्र के तालाबों और जलाशयों को अब बर्ड वॉचिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने इस दिशा में प्रारंभिक कदम उठाते हुए संभावित स्थलों का निरीक्षण किया है।
इस पहल का उद्देश्य पक्षियों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना और साथ ही ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना है।
पांच गांवों में किया गया सर्वे
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर 1 मार्च को जिला पंचायत के सीईओ कुमार बिश्वरंजन के नेतृत्व में एक टीम ने धरसींवा विकासखंड के पांच गांवों का दौरा किया।
निरीक्षण के दौरान माँढर, गोढ़ी, अकोली, बरबांदा और टोर गांव के तालाबों तथा आसपास के जल क्षेत्रों का जायजा लिया गया। टीम के साथ पक्षी विशेषज्ञ भी मौजूद थे, जिन्होंने इन क्षेत्रों में आने वाले प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की जानकारी एकत्र की।
स्थानीय सहभागिता पर जोर
निरीक्षण के दौरान संबंधित गांवों के सरपंच, स्व-सहायता समूहों के सदस्य और पंचायत कर्मचारी भी उपस्थित रहे। प्रशासन की योजना है कि बर्ड वॉचिंग सेंटर विकसित करते समय स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़कर गाइडिंग, साफ-सफाई, देखरेख और अन्य व्यवस्थाओं में रोजगार के अवसर सृजित करने की तैयारी है।
क्या होगी आगे की प्रक्रिया?
प्रशासन जल्द ही अधिकारियों और पक्षी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत बैठक करेगा। इसमें संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यटन प्रबंधन की रूपरेखा तय की जाएगी। यदि योजना सफल होती है, तो धरसींवा क्षेत्र आने वाले समय में पक्षी प्रेमियों और प्रकृति पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
संभावित लाभ
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प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण
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प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण
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ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा
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स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन
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पर्यावरण जागरूकता में वृद्धि