CG News : छत्तीसगढ़ के बस्तर में तंत्र साधना का केंद्र बना सिंगईगुड़ी शिव मंदिर
CG News : मध्य बस्तर में कटेकल्याण-जगदलपुर मार्ग पर, गुमड़ापाल गांव के पास “सिंगईगुड़ी” में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर आजकल तांत्रिक सिद्धियों और शिव साधना के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। जगदलपुर शहर से लगभग 42 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर बस्तर अंचल के उन चुनिंदा स्थलों में से एक है, जहां तंत्र-मंत्र की साधना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
साधना का महत्वपूर्ण आधार
गुमड़ापाल शिव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका योनिपीठ पर स्थापित शिवलिंग है, जो इसे साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। मंदिर का गर्भगृह और अंतराल दो प्रमुख भागों में बंटा हुआ है। गर्भगृह में जलाधारी या योनिपीठ पर शिवलिंग स्थापित है, जो यहां की धार्मिक और तांत्रिक परंपराओं को और भी गहराई देता है।
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13वीं-14वीं शताब्दी का स्थापत्य
यह प्राचीन शिव मंदिर, जो 13वीं-14वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजाओं द्वारा बनवाया गया था, बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक जीता-जागता प्रमाण है। पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए यह मंदिर अपनी स्थापत्य शैली से उस दौर की कला, संस्कृति और गहरी धार्मिक आस्था को बखूबी दर्शाता है। छत्तीसगढ़ के संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित यह स्थल, क्षेत्रीय वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है।
तांत्रिक सिद्धियों का केंद्र और विशेष आयोजन
स्थानीय पुजारी और श्रद्धालु मानते हैं कि यहां की गई शिव साधना से तांत्रिक क्रियाएं अधिक प्रभावी होती हैं, और यही कारण है कि अनेक साधक यहां पर सिद्धियाँ प्राप्त करने पहुंचते हैं। इसके अलावा, त्योहारी अवसरों और खासकर श्रावण मास में यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह मंदिर सिर्फ़ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का एक गौरवशाली प्रमाण भी है।