CG News : सक्ती राजघराने के ‘राजा’ धर्मेंद्र सिंह को अप्राकृतिक दुष्कर्म मामले में 7 साल की सजा

CG News : सक्ती राजघराने के 'राजा' धर्मेंद्र सिंह को अप्राकृतिक दुष्कर्म मामले में 7 साल की सजा

CG News : सक्ती राजघराने के ‘राजा’ धर्मेंद्र सिंह को अप्राकृतिक दुष्कर्म मामले में 7 साल की सजा

CG News : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित पूर्ववर्ती रियासत सक्ती के वर्तमान उत्तराधिकारी और स्वयंभू ‘राजा’ धर्मेंद्र सिंह को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 7 साल की कठोर सजा सुनाई है। उन पर राजपरिवार की ही एक महिला के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म करने का संगीन आरोप साबित हुआ है। यह मामला राज्य के प्रतिष्ठित और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार में से एक में अपराध और सत्ता के दुरुपयोग को उजागर करता है।

मामला क्या है?

यह प्रकरण वर्ष 2022 का है, जब पीड़िता ने सक्ती थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि राजपरिवार के वर्तमान उत्तराधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने उसके घर में जबरन घुसकर अप्राकृतिक कृत्य किया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 376 (अप्राकृतिक दुष्कर्म) और धारा 450 (गैरकानूनी रूप से घर में घुसना) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था।

कोर्ट का फैसला

21 मई 2025 को फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की न्यायाधीश गंगा पटेल ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सबूतों और गवाहों को मान्य मानते हुए आरोपी धर्मेंद्र सिंह को दोषी करार दिया। कोर्ट ने उन्हें धारा 376 के तहत 7 साल की कठोर सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना तथा धारा 450 के तहत 5 साल की सजा और 5,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना सुनाया। हालांकि सजा एकसाथ चलने के कारण धर्मेंद्र सिंह को कुल 7 साल जेल में रहना होगा। सजा सुनाए जाते ही उन्हें न्यायालय परिसर से सीधे जेल भेज दिया गया।

आरोपी कौन है?

30 वर्षीय धर्मेंद्र सिंह सक्ती राजपरिवार के पूर्व महाराज सुरेंद्र बहादुर सिंह के बेहद करीबी माने जाते थे। दिलचस्प बात यह है कि वे राजघराने के वंशज नहीं, बल्कि राजपरिवार में कार्यरत एक बावर्ची के बेटे हैं। बावजूद इसके, राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह ने उन्हें अपना दत्तक उत्तराधिकारी घोषित किया और 2021 में विधिवत रूप से ‘राज्याभिषेक’ भी कर दिया गया। हालांकि, सुरेंद्र बहादुर की पत्नी गीता राणा सिंह ने सार्वजनिक रूप से धर्मेंद्र को अपना पुत्र मानने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद वे ‘पाँचवें महाराज’ घोषित हुए और परिवार की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे।

राजनीतिक जुड़ाव

धर्मेंद्र सिंह न केवल सक्ती राजपरिवार का हिस्सा हैं, बल्कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित जिला पंचायत सदस्य भी हैं। यह सजा उनके राजनीतिक जीवन के लिए भी बड़ा झटका है और स्थानीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। उनकी गिरफ्तारी से भाजपा को भी बैकफुट पर आना पड़ सकता है, क्योंकि वे पार्टी से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे।

सामाजिक और कानूनी संदेश

इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के आगे सभी बराबर हैं। विशेष न्यायालय के इस फैसले ने महिला सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता की पुष्टि की है। यह उन पीड़ितों के लिए एक उदाहरण बन सकता है जो सामाजिक दबाव या प्रभावशाली परिवारों के डर से अपनी आवाज नहीं उठा पाते।

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