Chhattisgarh News : हाउस ऑफ पुचका” की कहानी: रायपुर की ईशा पटेल से प्रधानमंत्री मोदी तक का सफर
Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की रहने वाली 23 वर्षीय ईशा पटेल आज लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं। अपने स्टार्टअप “हाउस ऑफ पुचका” के ज़रिए उन्होंने न सिर्फ गोलगप्पों को एक हाइजीनिक ब्रांड में बदला, बल्कि ये भी साबित किया कि अगर जज़्बा हो तो छोटे आइडिया से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
कॉर्पोरेट जॉब छोड़कर स्टार्टअप की राह
ईशा ने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) करने के बाद मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी में 6 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर काम शुरू किया था। लेकिन कुछ ही समय में उन्हें एहसास हुआ कि कॉर्पोरेट लाइफ उनका सपना नहीं, सिर्फ एक पड़ाव है। उन्होंने तय किया कि अब कुछ “अपना” करना है — ऐसा जो दिल से जुड़ा हो।
जब ‘गोलगप्पा’ बना बिजनेस आइडिया
गोलगप्पे यानी गुपचुप – हर भारतीय का फेवरिट स्ट्रीट फूड। लेकिन क्या इसे भी हाइजीनिक, ब्रांडेड और कैफे कल्चर में लाया जा सकता है?
ईशा ने रिसर्च शुरू की, अलग-अलग शहरों में स्ट्रीट फूड और गोलगप्पे के फ्लेवर्स का स्टडी किया और “हाउस ऑफ पुचका” की नींव रखी – एक ऐसा कैफे जहां न केवल स्वाद, बल्कि सफाई और क्वालिटी की गारंटी हो।
मुद्रा योजना बनी सहारा
शुरुआत आसान नहीं थी। फंडिंग एक चुनौती बनी हुई थी, एजेंसियां भरोसा नहीं कर रही थीं। ऐसे में भारत सरकार की मुद्रा योजना ने ईशा का साथ दिया।उन्होंने इस योजना के तहत 6 लाख रुपये का लोन लिया और रायपुर में अपने सपनों का गोलगप्पा कैफे शुरू किया।
प्रधानमंत्री मोदी से हुई खास मुलाकात
मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 10 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर से चुनिंदा सफल उद्यमियों को पीएम मोदी से मिलने का अवसर मिला — और ईशा भी उनमें से एक थीं।
प्रधानमंत्री ने न सिर्फ उनके बिजनेस मॉडल की सराहना की, बल्कि उनके आत्मविश्वास और रिसर्च-बेस्ड सोच को भी प्रेरणादायक बताया।
परिवार बना प्रेरणा
ईशा के पिता नवीन पटेल एक व्यापारी हैं और माँ रश्मि पटेल गृहिणी। रायपुर के खमतराई इलाके में रहने वाला यह परिवार आज गर्व से देख रहा है कि उनकी बेटी सिर्फ एक बिजनेसवुमन नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गई है।