मस्कट पहुंची INSV कौंडिन्य, भारत की समुद्री विरासत को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
नई दिल्ली : भारत की पारंपरिक समुद्री क्षमता को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम उपलब्धि सामने आई है। प्राचीन जहाज निर्माण शैली पर आधारित नौका INSV कौंडिन्य ने गुजरात से ओमान के मस्कट तक अपनी ऐतिहासिक समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।
इस उपलब्धि पर केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने खुशी जताते हुए कहा कि यह अभियान भारत के समुद्री इतिहास को फिर से जीवंत करने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने इसे देश की पारंपरिक तकनीक, कौशल और आत्मनिर्भर सोच का प्रतीक बताया।

मंत्री ने कहा कि यह 18 दिन लंबी यात्रा यह दर्शाती है कि भारत न केवल आधुनिक समुद्री शक्ति है, बल्कि उसकी जड़ें प्राचीन नौवहन ज्ञान में भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को मजबूती देती है, जिसके तहत भारत अपनी सांस्कृतिक और तकनीकी विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि INSV कौंडिन्य का मस्कट पहुंचना भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच ऐतिहासिक समुद्री संपर्कों और सांस्कृतिक रिश्तों को नई ऊर्जा देने वाला कदम है। यह यात्रा दोनों क्षेत्रों के बीच पुराने व्यापारिक मार्गों और सभ्यतागत संबंधों की याद दिलाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभियान आने वाले समय में समुद्री सांस्कृतिक कूटनीति और विरासत आधारित परियोजनाओं को नई दिशा दे सकता है।