CG News: पागल कुत्ते का आतंक: 24 घंटे में 19 लोगों को काटा, गांवों में दहशत का माहौल
CG News: बेमेतरा जिले के थानखम्हरिया क्षेत्र के अंतर्गत दर्री और आसपास के इलाकों में एक पागल कुत्ते के आतंक से भारी दहशत का माहौल बन गया है, पिछले 24 घंटों के भीतर इस खूंखार श्वान ने दर्री गांव में 12 ग्रामीणों, थानखम्हरिया में 2 और बनिया गाँव
में 2 सगी बहनों समेत कुल 19 लोगों को काटकर घायल कर दिया है, लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोग घर से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं.
रात से सुबह तक जारी रहा हमलों का सिलसिला
ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार रात से शुरू हुआ यह सिलसिला शनिवार सुबह तक चलता रहा, पागल कुत्ता अचानक पीछे से हमला कर लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर काटने लगा, इस दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी उसने निशाना बनाया, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई, कई गांवों में लोग अब लाठी-डंडे लेकर पहरा देने को मजबूर हैं.

दर्री गांव में सबसे अधिक लोग घायल
दर्री गांव में इस श्वान ने सबसे ज्यादा लोगों को घायल किया, घायल ग्रामीण नारायण सिंह के मुताबिक श्वान ने शुक्रवार रात से हमला करना शुरू किया और शनिवार सुबह तक कई लोगों को काट लिया, घायलों में कुल 11 ग्रामीण शामिल हैं, इन घायलों में छह महिलाएं और चार पुरुष बताए जा रहे हैं, जिन्हें गंभीर चोटें आई हैं.
अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन की कमी उजागर
एक ओर जहां घायलों की संख्या बढ़ती जा रही थी, वहीं थानखम्हरिया के सरकारी अस्पताल की बदहाली भी सामने आई, अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा, बाद में स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में साजा और जिला अस्पताल बेमेतरा से वैक्सीन मंगवाकर घायलों को टीका लगाया, इस अव्यवस्था से परिजनों में काफी नाराजगी देखी गई, क्योंकि समय पर टीका न मिलने से रेबीज जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.
स्थानीय खरीद के भरोसे चल रहा स्वास्थ्य विभाग
जिले में एंटी-रेबीज वैक्सीन की कमी नई समस्या नहीं है, जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन द्वारा पिछले एक वर्ष से जिले में पर्याप्त वैक्सीन की नियमित आपूर्ति नहीं की जा रही है, इस कारण स्वास्थ्य विभाग को कई बार स्थानीय बाजार से वैक्सीन खरीदकर अस्पतालों में उपलब्ध करानी पड़ रही है, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल ने बताया कि सीजीएमएससी की अनुमति के बाद ही खरीदी की जाती है और विभाग द्वारा लगातार डिमांड भेजी जा रही है.
कागजों में सीमित दिख रहे अभियान
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को श्वानों की गणना, नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण के निर्देश दिए गए थे, स्कूलों के आसपास घूमने वाले कुत्तों को पकड़ने के लिए टीम बनाने की बात भी कही गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का असर नजर नहीं आ रहा है, इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है.
कई गांवों के लोग हुए शिकार
इस घटना का दायरा केवल दर्री तक सीमित नहीं रहा, बनिया गाँव में तानिया कुमारी (15) और नेहा कुमारी (13) नाम की दो सगी बहनें भी पागल कुत्ते का शिकार बन गईं, इसके अलावा सोनचिरैया गाँव की लोकिता (15), कंपा गाँव के गिरधर यादव (58), थानखम्हरिया के मुकेश जोशी और साकेत अग्रवाल, हाटराका गाँव की 10 वर्षीय लक्ष्मी वर्मा तथा खैरझिटी कला के अमन राजपूत भी घायल हुए हैं, सभी घायलों को थानखम्हरिया के सरकारी अस्पताल में भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया गया.
गर्मी में और बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ कुत्तों के व्यवहार में बदलाव आता है और काटने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, फिलहाल जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में करीब 400 वैक्सीन डोज उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन मरीजों की संख्या को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है, वर्ष 2025 में जिले में 800 से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए थे, जिनके इलाज के लिए लगभग 2400 वैक्सीन डोज की जरूरत पड़ी थी, ऐसे में आने वाले समय में पर्याप्त वैक्सीन स्टॉक सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.