CG News: स्टाफ की कमी बताकर नहीं रोक सकते छुट्टी, हाईकोर्ट ने महिला वार्डर के पक्ष में दिया फैसला

CG News: स्टाफ की कमी बताकर नहीं रोक सकते छुट्टी, हाईकोर्ट ने महिला वार्डर के पक्ष में दिया फैसला

CG News: स्टाफ की कमी बताकर नहीं रोक सकते छुट्टी, हाईकोर्ट ने महिला वार्डर के पक्ष में दिया फैसला

CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारी के चाइल्ड केयर लीव मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने बिलासपुर सेंट्रल जेल प्रशासन के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें महिला वार्डर की अतिरिक्त छुट्टी का आवेदन खारिज किया गया था. साथ ही 7 दिनों के भीतर 60 दिन की अतिरिक्त छुट्टी मंजूर करने के निर्देश दिए गए हैं.

महिला वार्डर ने मांगी थी अतिरिक्त छुट्टी

बिलासपुर सेंट्रल जेल में पदस्थ महिला वार्डर ने जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए चाइल्ड केयर लीव लिया था. उन्होंने 13 अप्रैल 2026 से 11 जुलाई 2026 तक 90 दिनों की छुट्टी ली थी. बच्चों की कम उम्र को देखते हुए उन्होंने आगे 60 दिन का अवकाश बढ़ाने के लिए आवेदन किया था.

हाईकोर्ट ने चाइल्ड केयर लीव पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। - Dainik Bhaskar

कर्मचारियों की कमी बताकर किया गया था इनकार

महिला वार्डर के आवेदन को जेल प्रशासन ने कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया था. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में बताया गया कि नियमों के अनुसार महिला कर्मचारी को पूरे सेवाकाल में 730 दिनों तक चाइल्ड केयर लीव का अधिकार है.

शासन ने प्रशासनिक परेशानी का दिया तर्क

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि बिलासपुर सेंट्रल जेल में वार्डर के कई पद खाली हैं. स्वीकृत पदों के मुकाबले कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए छुट्टी देना मुश्किल था.

मां को बच्चों की देखभाल का अधिकार

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि चाइल्ड केयर लीव का उद्देश्य मां को छोटे बच्चों की देखभाल और उनके विकास के लिए समय देना है. पात्र महिला कर्मचारी को केवल स्टाफ की कमी या प्रशासनिक समस्या के आधार पर इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.

वैकल्पिक व्यवस्था बनाना नियोक्ता की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की कमी दूर करना और वैकल्पिक व्यवस्था करना विभाग की जिम्मेदारी है. किसी कर्मचारी के वैधानिक अधिकारों को प्रशासनिक कारणों से खत्म नहीं किया जा सकता. कोर्ट के फैसले से महिला कर्मचारियों के चाइल्ड केयर लीव अधिकार को मजबूती मिली है.

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