CG News : गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी में ‘नमाज कांड’ फिर गरमाया, हिंदू संगठनों का घेराव
CG News : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में है। विश्वविद्यालय के एनएसएस कैंप में छात्र-छात्राओं को कथित रूप से नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किए जाने के आरोपों को लेकर शहर में हिंदूवादी संगठनों का गुस्सा फिर उफान पर है। शुक्रवार को कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय का घेराव कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और कुलपति को हटाने व एनएसएस कोऑर्डिनेटर को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।
थाने में दर्ज कराई शिकायत
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब 31 मार्च को ईद पर्व के अवसर पर विश्वविद्यालय की एनएसएस इकाई द्वारा कोटा क्षेत्र के शिवतराई में आयोजित शिविर में नमाज पढ़वाने का मामला सामने आया। आरोप है कि वहां मुस्लिम समाज के साथ-साथ हिंदू विद्यार्थियों को भी एक साथ नमाज पढ़ने के लिए कहा गया, जिससे कई छात्रों ने धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए कोनी थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी।
प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि यह विश्वविद्यालय में धार्मिक जबरदस्ती का पहला मामला नहीं है। छात्रों ने दावा किया कि पूर्व में भी इस प्रकार का दबाव बनाया गया है, लेकिन हर बार प्रशासन चुप्पी साध लेता है। जब पहले इस मामले पर विरोध हुआ था, तब कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित कर 48 घंटे में रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दावा किया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं हुई।
कुलपति को हटाने की मांग तेज
शुक्रवार को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया। ‘वंदे मातरम मित्र मंडल’ सहित अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भगवा जैकेट पहनकर विरोध में शामिल हुए और प्रशासन पर पक्षपात व निष्क्रियता के आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल किसी धर्म विशेष का विरोध नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और विश्वविद्यालय के सेक्युलर ढांचे को बनाए रखने की लड़ाई है।
सभा में वक्ताओं ने साफ कहा कि यदि दोषियों पर शीघ्र और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर ‘हिंदू आक्रोश रैली’ का आयोजन करेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कुलपति को तुरंत पद से हटाया जाए और एनएसएस के कोऑर्डिनेटर को बर्खास्त कर विश्वविद्यालय में धर्मनिरपेक्षता की रक्षा की जाए।
इस पूरे मामले ने विश्वविद्यालय परिसर को एक बार फिर से तनावपूर्ण बना दिया है, जहां छात्र संगठनों, अभिभावकों और राजनीतिक दलों की भी निगाहें टिक गई हैं। प्रशासन की अगली कार्रवाई अब इस बहस का केंद्र बन गई है कि क्या देश के शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक गतिविधियों का संचालन विवेक और मर्यादा के साथ हो पा रहा है या नहीं।