CG News: डोंगरगढ़ वन विभाग में करोड़ों का घोटाला: जांच में फर्जीवाड़ा साबित, लेकिन दोषी आज भी बेखौफ!

CG News: डोंगरगढ़ वन विभाग में करोड़ों का घोटाला: जांच में फर्जीवाड़ा साबित, लेकिन दोषी आज भी बेखौफ!

CG News: डोंगरगढ़ वन विभाग में करोड़ों का घोटाला: जांच में फर्जीवाड़ा साबित, लेकिन दोषी आज भी बेखौफ!

CG News: डोंगरगढ़ से सामने आया करोड़ों रुपये का वन विभाग घोटाला छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक सिस्टम की नींव हिला देने वाला मामला है। साल 2021 में बोरतलाव और कटेमा गांव के जंगलों में बांस रोपण, फेंसिंग और मिट्टी भराई जैसे कार्यों के लिए सरकार ने भारी बजट जारी किया। लेकिन ये काम कागज़ों तक ही सीमित रह गए।

फर्जी मजदूर, झूठा भुगतान, और लूट का खुला खेल

जांच में खुलासा हुआ कि जिन ग्रामीणों के नाम पर मजदूरी का भुगतान दर्शाया गया, उनमें से कई तो स्कूल के छात्र, गर्भवती महिलाएं और ऐसे लोग थे जिन्होंने कभी गड्ढा तक नहीं खोदा। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनके खातों में पैसे डाले गए, फिर विभागीय कर्मचारियों ने ATM या चेक के ज़रिए पैसे निकलवाकर खुद रख लिए। बदले में ग्रामीणों को दो-चार सौ रुपये देकर चुप कराया गया।

तहसीलदार की रिपोर्ट: “घोटाला साबित”

शिकायत के बाद मामले की जांच की ज़िम्मेदारी तहसीलदार मुकेश ठाकुर को सौंपी गई। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि  “काम हुए ही नहीं, फिर भी भुगतान हुआ और पैसे गबन किए गए।” ग्रामीणों के बयान भी रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जिनमें उन्होंने स्वीकार किया कि उनके खातों से जबरन पैसे निकाले गए।

तीन साल से न्याय की आस – लेकिन ‘सिस्टम’ है खामोश

जांच रिपोर्ट आने के तीन साल बाद भी न तो किसी अफसर पर कार्रवाई हुई, न कोई कर्मचारी निलंबित हुआ।
शिकायतकर्ता रायपुर से दिल्ली तक चक्कर लगा चुका है, लेकिन फाइलें बंद दराजों में पड़ी हैं और सिस्टम चुपचाप तमाशा देख रहा है।

SDO ने साधी चुप्पी – क्या बचाए जा रहे हैं ‘बड़े नाम’?

जब इस मामले पर वन विभाग की SDO पूर्णिमा राजपूत से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
ऐसी चुप्पी यह इशारा करती है कि शायद इस फर्जीवाड़े में बड़े अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत है। क्योंकि अगर कार्रवाई शुरू हुई, तो कई कुर्सियां हिल सकती हैं।


मुख्य सवाल – जब घोटाला साबित हो चुका है, तो दोषी क्यों आज़ाद घूम रहे हैं?

क्या जांच सिर्फ दिखावा थी?

 क्या नेताओं और अफसरों को बचाने की कोशिश हो रही है?

 क्या आम जनता के हक की लूट को ऐसे ही दबा दिया जाएगा?


डोंगरगढ़ घोटाला – एक आईना, जिसमें नजर आता है भ्रष्ट सिस्टम का चेहरा

यह सिर्फ एक वित्तीय अनियमितता नहीं, यह सरकारी तंत्र की लाचारी और भ्रष्टाचार की कहानी है। जहां
जांच रिपोर्टें “क्लोज़ फाइल” बन जाती हैं, और
इंसाफ किसी नई फाइल के नीचे दब जाता है।

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