CG News:देर आए, दुरुस्त आए: 20साल बाद हुई न्याय की जीत

CG News:देर आए, दुरुस्त आए: 20साल बाद हुई न्याय की जीत

CG News:देर आए, दुरुस्त आए: 20साल बाद हुई न्याय की जीत

CG News: जिले में दो दशक पहले हुए धान खरीदी घोटाले में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। वर्ष 2003-04 में कामेश्वरपुर और रामचंद्रपुर के सहकारी समितियों में हुए धान खरीदी में बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी, जिस पर अब कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। इस मामले में कुल 17 दोषियों को कारावास की सजा सुनाई गई है, साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला दिखाता है कि भले ही न्याय में देर हो सकती है, लेकिन अंततः दोषियों को उनके कर्मों का फल मिलता ही है।

रामानुजगंज नगर पालिका अध्यक्ष के परिजन भी दोषी
इस घोटाले में रामानुजगंज नगर पालिका के अध्यक्ष रमन अग्रवाल के सगे भाई और चाचा भी शामिल हैं, जो इस मामले की गंभीरता और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता को दर्शाता है। कोर्ट का यह फैसला यह भी साबित करता है कि कानून की नजर में सभी समान हैं, चाहे वे कितने भी रसूखदार क्यों न हों।

कागजों में हुई धान खरीदी, किसानों का पैसा हड़पा
यह घोटाला किसानों के साथ एक बड़ा विश्वासघात था। दरअसल, दोषियों ने कागजों में ही धान की खरीदी दिखा दी थी, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं हुआ था। किसानों ने अपनी मेहनत की फसल बेची थी, लेकिन उसका पैसा इन दोषियों के खातों में चला गया। यह किसानों की मेहनत और हक का सीधा-सीधा हनन था।

कोर्ट का फैसला: 3 साल की सजा और जुर्माना
लंबे समय तक चले इस मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने धान खरीदी में गड़बड़ी करने वाले सभी 17 आरोपियों को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी को तीन-तीन साल की कारावास की सजा और 500-500 रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। यह सजा उन लोगों के लिए एक सबक है जो किसानों के हक पर डाका डालते हैं।

कलेक्टर के आदेश पर दर्ज हुई थी एफआईआर
इस घोटाले का पर्दाफाश कलेक्टर के आदेश पर फूड विभाग के अफसरों की जांच रिपोर्ट के आधार पर हुआ था। जांच में गड़बड़ी पाए जाने के बाद दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद यह मामला कोर्ट में चला।

निचली अदालत के फैसले को ऊपरी अदालत ने भी बरकरार रखा
गौरतलब है कि निचली अदालत ने इस मामले में वर्ष 2018 में भी सजा सुनाई थी। हालांकि, आरोपियों ने इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की थी। लेकिन ऊपरी अदालत ने भी उनकी अपील को खारिज करते हुए रामानुजगंज जिला न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। इससे यह स्पष्ट हो गया कि दोषियों के खिलाफ सबूत पुख्ता थे और उन्हें उनके किए की सजा मिलकर रहेगी।

किसानों के लिए न्याय की उम्मीद
यह फैसला बलरामपुर के उन किसानों के लिए न्याय की एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है जिन्होंने इस घोटाले के कारण नुकसान उठाया था। भले ही उन्हें उनका पैसा वापस नहीं मिला होगा, लेकिन दोषियों को सजा मिलने से उन्हें कुछ हद तक संतोष जरूर मिलेगा। यह फैसला यह भी संदेश देता है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखना व्यर्थ नहीं जाता।

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