CG News: CGPSC और DMF घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, उत्कर्ष चंद्राकर और सतपाल छाबड़ा गिरफ्तार
CG News: छत्तीसगढ़ में CGPSC और DMF घोटाले की जांच के बीच ED ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने CGPSC घोटाले के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर और DMF घोटाले में आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपियों को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 5 सितंबर तक कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है. ED के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आए नए सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है.
सात ठिकानों पर ED की छापेमारी
ED ने इस मामले में प्रदेश के 7 ठिकानों पर छापेमारी की. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के PA रहे केके चंद्रवंशी, पूर्व OSD चेतन बोरघारिया और पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत के ठिकाने शामिल हैं. दुर्ग में दो स्थानों पर जांच की गई. भिलाई में केके चंद्रवंशी के घर ED की टीम सुबह करीब 6 बजे 2-3 गाड़ियों से पहुंची और दस्तावेजों समेत अन्य सामान की जांच की. वहीं, दुर्ग के सिकोला भाठा की बंगाली कॉलोनी में कमलेश राजपूत के घर करीब 8 अधिकारियों ने दो गाड़ियों से कार्रवाई की.
DMF में 30 करोड़ और CGPSC में 3.11 करोड़ के आरोप
ED के वकील सौरभ पांडेय के अनुसार, जांच के दौरान घोटाले से जुड़े नए प्रमाण मिले हैं. सतपाल सिंह छाबड़ा पर DMF घोटाले में करीब 30 करोड़ रुपए कमीशन लेने का आरोप है. दूसरी ओर, CGPSC घोटाले में उत्कर्ष चंद्राकर पर अलग-अलग उम्मीदवारों से कुल 3 करोड़ 11 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया है. आरोप है कि उत्कर्ष ने कई लोगों को यह भरोसा दिलाया कि यदि उनका डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन नहीं हुआ, तो उन्हें फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में पोस्टिंग दिलाई जा सकती है.
चेतन बोरघारिया और कमलेश राजपूत के ठिकानों पर भी जांच
पूर्व OSD चेतन बोरघारिया के दो ठिकानों पर भी ED की कार्रवाई हुई. वर्तमान में बलरामपुर के अपर कलेक्टर बोरघारिया से बलरामपुर सर्किट हाउस में पूछताछ की गई, जबकि धमतरी के अमलतास पुरम स्थित उनके घर में दस्तावेजों की जांच की गई. कमलेश राजपूत के परिवार के सदस्यों की सरकारी पदों पर नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं को भी खंगाला गया. जानकारी के मुताबिक, उनकी दो बेटियां पटवारी, एक बेटी उपपंजीयक और बेटा नायब तहसीलदार हैं. इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को जमानत दी है.
2020-22 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है मामला
CGPSC घोटाले की जांच 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ी है. यह कार्रवाई पूर्व CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की 25 जुलाई को हुई गिरफ्तारी के बाद आगे बढ़ी है. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच 2024 में CBI की ओर से दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी. CBI का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए कथित तौर पर अवैध लेन-देन हुआ. CGPSC 2021 परीक्षा में 171 पदों के लिए भर्ती हुई थी, जिसका प्री एग्जाम 13 फरवरी 2022 को हुआ और 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए. इसके बाद 26 से 29 मई 2022 तक हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए, जबकि इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई.
यह भी पढ़ें : CG News: बालोद में आवारा कुत्तों का आतंक, एक दिन में 13 लोगों को काटा