CG News: इंद्रजीत सिंह की HTC कंपनी पर GST की छापेमारी, 1500 ट्रकों के कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले
CG News: छत्तीसगढ़ के प्रमुख ट्रांसपोर्ट कारोबारी इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू की कंपनी हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी यानी HTC के कई ठिकानों पर सोमवार को GST टीम ने छापेमार कार्रवाई की. अधिकारियों ने भिलाई स्थित कंपनी के ऑफिस और गोदाम के साथ बलौदाबाजार के यार्ड में भी कारोबारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की. टीम ने करीब 6 घंटे तक अलग-अलग दस्तावेजों को खंगाला, हालांकि कार्रवाई की वजह को लेकर विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.

1500 ट्रकों के संचालन से जुड़ी कंपनी
इंद्रजीत सिंह छत्तीसगढ़ के प्रमुख ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में शामिल हैं और उनकी कंपनी करीब 1500 ट्रकों के संचालन से जुड़ी बताई जाती है. HTC के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा स्टील प्लांट यानी BSP से भी संबंधित है. जानकारी के मुताबिक कंपनी की करीब 60 से 70 गाड़ियां BSP में परिवहन और प्लांट के भीतर लोडिंग से जुड़े कामों में लगी हुई हैं. ऐसे में GST टीम ने कंपनी के परिवहन कारोबार से संबंधित रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया है.
भिलाई से बलौदाबाजार तक जांच
GST अधिकारियों ने कंपनी के अलग-अलग कारोबारी ठिकानों पर पहुंचकर दस्तावेजों की पड़ताल की. भिलाई के ऑफिस और गोदाम के अलावा बलौदाबाजार स्थित यार्ड में भी टीम ने रिकॉर्ड खंगाले. कंपनी का कारोबार कई स्थानों पर संचालित होने के कारण जांच का दायरा भी अलग-अलग ठिकानों तक पहुंचा. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि अधिकारियों को जांच के दौरान कोई टैक्स अनियमितता या दूसरी गड़बड़ी मिली है या नहीं.
कौन हैं इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू
इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू भिलाई के जाने-माने ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में शामिल हैं. वे हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी के डायरेक्टर बताए जाते हैं और करीब 1500 ट्रकों के संचालन से जुड़े हैं. कारोबार के अलावा वे सामाजिक और खेल संगठनों से भी जुड़े हुए हैं. उनके राजनीति में आने और आगामी विधानसभा चुनाव में संभावित तौर पर चुनाव लड़ने को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं, हालांकि इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है.
जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर
GST की इस कार्रवाई के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है. फिलहाल विभाग ने टैक्स चोरी या किसी वित्तीय अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि जांच के दौरान कौन से दस्तावेज जब्त किए गए हैं या अधिकारियों को रिकॉर्ड में क्या जानकारी मिली है. ऐसे में कार्रवाई की वास्तविक वजह और आगे की स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
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