CG News: MBBS डॉक्टरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सेवा बांड हुआ स्वतः निरस्त
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एमबीबीएस स्नातकों को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि छह माह के भीतर नियुक्ति नहीं मिलने पर सेवा बांड स्वतः समाप्त माना जाएगा। कोर्ट ने विलंब से जारी नियुक्ति आदेशों को अमान्य ठहराते हुए बिना बांड राशि वसूले एनओसी और डिग्री जारी करने के निर्देश दिए हैं।
छह माह में नियुक्ति नहीं, तो बांड स्वतः खत्म
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एमबीबीएस स्नातकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा ने दलील दी कि नियम 10(6) के अनुसार एमबीबीएस और इंटर्नशिप पूरी होने के छह माह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं होने पर सेवा बांड स्वतः समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की देरी के कारण छात्रों के उच्च शिक्षा और करियर पर प्रतिकूल असर पड़ा, जबकि एनओसी भी रोक दी गई।
कोर्ट ने नियुक्ति आदेश किए अमान्य
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि अभ्यर्थी सेवा बांड से बंधे हैं और उन्होंने काउंसलिंग में भाग लेकर नियुक्ति प्रक्रिया स्वीकार कर ली थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि वैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध ‘एस्टॉपल’ लागू नहीं होता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छह माह की समय-सीमा समाप्त होते ही बांड समाप्त हो गया था। इसलिए बाद में हुई काउंसलिंग और 24 दिसंबर 2025 को जारी नियुक्ति आदेश कानूनी रूप से प्रभावहीन और गैर-बाध्यकारी हैं।

बिना जुर्माने मिलेगा NOC
हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी याचिकाकर्ता को सरकारी सेवा स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। साथ ही सामान्य वर्ग से 25 लाख रुपये और आरक्षित वर्ग से 20 लाख रुपये की बांड राशि वसूलने को भी नियमों के विरुद्ध बताया। अदालत ने राज्य सरकार को बिना किसी दंड या बांड राशि की मांग किए तत्काल एनओसी जारी करने और विश्वविद्यालय को पात्र छात्रों की एमबीबीएस डिग्री प्रदान करने के निर्देश दिए। यह फैसला भविष्य में ऐसे सभी मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी नजीर माना जा रहा है।