CG News: अंबिकापुर के कमोदा रिसॉर्ट पर प्रशासन का शिकंजा, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप, कार्रवाई टली
CG News: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में करोड़ों की सरकारी जमीन पर बने कमोदा रिसॉर्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रिसॉर्ट पर सरकारी जमीन और पुनर्वास भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप लगा है, राजस्व विभाग की जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रशासन बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचा, लेकिन कार्रवाई शुरू होने से पहले ही माहौल बदल गया और टीम को वापस लौटना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
अंबिकापुर के कमोदा रिसॉर्ट पर आरोप है कि इसका निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया है। शिकायतकर्ता दीपक राय ने इस मामले की शिकायत सरगुजा कलेक्टर से की थी, बताया जा रहा है कि रिसॉर्ट परिसर के लिए 45 डिसिमल से ज्यादा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया। इसके अलावा पुनर्वास भूमि खरीदकर भी निर्माण किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।
जांच में सामने आया अतिक्रमण
मामले की जांच तहसीलदार स्तर पर की गई थी। तहसीलदार न्यायालय ने करीब छह महीने पहले अपने आदेश में माना था कि रिसॉर्ट संचालकों ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, इसके बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में दोबारा शिकायत होने पर सरगुजा कलेक्टर ने अंबिकापुर SDM और राजस्व विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए।
बुलडोजर लेकर पहुंचा प्रशासन
SDM वन सिंह नेताम के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। करीब चार घंटे तक सरकारी जमीन और रिसॉर्ट परिसर का सीमांकन किया गया, इसके बाद अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी मशीन भी बुला ली गई थी।
कार्रवाई के दौरान हुआ विरोध
जैसे ही तोड़फोड़ की तैयारी शुरू हुई, रिसॉर्ट संचालकों और उनके परिजनों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि उन्हें पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया, रिसॉर्ट संचालकों ने यह भी दावा किया कि इसी जमीन के आधार पर उन्हें बैंक से लोन मिला है और नगर निगम से निर्माण का नक्शा भी पास हुआ है।
पूर्व मंत्री के पहुंचते ही रुकी कार्रवाई
इसी दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई रोक दी और जेसीबी के साथ टीम वापस लौट गई, हालांकि SDM वन सिंह नेताम ने कहा कि रिसॉर्ट संचालकों को दो दिन का समय दिया गया है। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी, माना जा रहा है कि रिसॉर्ट संचालक अब कोर्ट का रुख कर सकते हैं। यदि उन्हें न्यायालय से राहत मिलती है तो प्रशासनिक कार्रवाई पर अस्थायी रोक लग सकती है।