CG News: छत्तीसगढ़ में 2300 डीएड अभ्यर्थियों का 98वां दिन, न्याय, सम्मान और नियुक्ति की मांग जारी

CG News: छत्तीसगढ़ में 2300 डीएड अभ्यर्थियों का 98वां दिन, न्याय, सम्मान और नियुक्ति की मांग जारी

CG News: छत्तीसगढ़ में 2300 डीएड अभ्यर्थियों का 98वां दिन, न्याय, सम्मान और नियुक्ति की मांग जारी

CG News: छत्तीसगढ़ के 2300 चयनित डीएड अभ्यर्थियों का संघर्ष आज 98वें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह केवल नौकरी की मांग नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और सम्मान की लड़ाई बन चुका है। अभ्यर्थी हर दिन सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की गुहार लगा रहे हैं।

घुटनों के बल प्रदर्शन

आज अभ्यर्थियों ने घुटनों के बल चलकर 2300 पदों पर शीघ्र नियुक्ति की अपील की। इस दौरान कई अभ्यर्थियों के घुटने लहूलुहान हो गए और कुछ के पैरों में गंभीर घाव व फफोले पड़े। बावजूद इसके उनका हौसला नहीं टूटा।

जल समाधि का मार्मिक प्रयास

अभ्यर्थियों ने तूता धरना स्थल के पास तालाब में जल समाधि लेने का प्रयास किया। यह दृश्य अत्यंत मार्मिक और झकझोर देने वाला था। कई अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल हुए, जो यह दर्शाता है कि उनके संघर्ष में सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और न्यायिक पहलू भी जुड़ा है।

पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रश्न

इस दौरान 10 डीएड अभ्यर्थियों को झूठ बोलकर अभनपुर थाना ले जाया गया और सेंट्रल जेल भेज दिया गया। कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 170, 126 और 136 के तहत की गई।

शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ आंदोलन

• चरण 1: 24 दिसंबर से अमरण अनशन शुरू, उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट आदेश का पालन कर वैध नियुक्ति दिलाना।
• चरण 2: मौन धरना, कैंडल मार्च — न्याय की उम्मीद को जिंदा रखना।
• चरण 3: “एक कप चाय न्याय के नाम” अभियान, सांकेतिक भीख मांगकर आम जनता को जोड़ना।
• चरण 4: दंडवत प्रणाम यात्रा और घुटनों के बल चलना, पीड़ा और संघर्ष का भावनात्मक प्रदर्शन।
• चरण 5: धार्मिक माध्यम — रामनवमी कलश यात्रा, हनुमान चालीसा, नवकन्या पूजा।
• चरण 6: कठोर प्रतीकात्मक प्रदर्शन — जल सत्याग्रह और अंगारों पर चलना।
• चरण 7: सीधे संवाद का प्रयास — शिक्षा मंत्री के बंगले पर निवेदन।

अभ्यर्थियों की मांग

अभ्यर्थियों ने सरकार से हाथ जोड़कर अपील की है कि 2300 पदों पर तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। उनका कहना है कि यह केवल नौकरी की मांग नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य, आत्मसम्मान और जीवन की लड़ाई है।

सवाल सरकार के लिए

पिछले कई महीनों से अभ्यर्थी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन अब उनका धैर्य टूटता हुआ दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि क्या सरकार इन युवाओं की पीड़ा को समझेगी या कोई बड़ी अनहोनी होने का इंतजार करेगी?

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